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प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम का विस्तार: महाराष्ट्र में एक साल में 93 केंद्र बढ़े
देश में किडनी की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में डायलिसिस सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम PMNDP अब देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। 30 जून 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत 751 जिलों को डायलिसिस सेवाओं से जोड़ा गया है। इनमें 44 लिंक्ड जिले शामिल हैं। देशभर में 1,856 हेमोडायलिसिस केंद्र स्थापित किए गए हैं और इन केंद्रों पर 13,535 हेमोडायलिसिस मशीनें उपलब्ध हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने 11 अगस्त 2026 को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। सरकार के मुताबिक, कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिला अस्पतालों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराना और पात्र मरीजों को मुफ्त डायलिसिस सेवा तक पहुंच देना है।
डायलिसिस को जिला स्तर तक पहुंचाने की कोशिश
किडनी फेलियर या अंतिम चरण के किडनी रोग से पीड़ित मरीजों के लिए डायलिसिस जीवनरक्षक उपचार हो सकता है। ऐसे मरीजों को सप्ताह में कई बार डायलिसिस की आवश्यकता पड़ सकती है। यदि मरीज को इसके लिए बार-बार किसी बड़े शहर या निजी अस्पताल की यात्रा करनी पड़े तो इलाज का खर्च, यात्रा का खर्च और समय—तीनों परिवार पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम का उद्देश्य इसी चुनौती को कम करना है। इसके तहत जिला अस्पतालों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में डायलिसिस केंद्र विकसित किए जाते हैं, ताकि मरीजों को अपने जिले या आसपास के क्षेत्र में उपचार मिल सके। सरकार के अनुसार, पात्र मरीजों को इन सेवाओं का लाभ मुफ्त उपलब्ध कराया जाता है। इससे उन परिवारों के लिए आर्थिक राहत की संभावना बढ़ती है जिनके किसी सदस्य को लंबे समय तक नियमित डायलिसिस की जरूरत होती है।
36 में से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यक्रम लागू
पीएमएनडीपी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक इसका देशव्यापी विस्तार है। कार्यक्रम वर्तमान में सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। 30 जून 2026 तक:
- 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश कार्यक्रम के दायरे में हैं
- 751 जिले कवर किए गए हैं
- इनमें 44 लिंक्ड जिले शामिल हैं
- 1,856 हेमोडायलिसिस केंद्र स्थापित हैं
- 13,535 हेमोडायलिसिस मशीनें उपलब्ध हैं
यह नेटवर्क सरकारी स्वास्थ्य ढांचे में डायलिसिस सेवाओं को जिला स्तर तक पहुंचाने की कोशिश को दर्शाता है।
महाराष्ट्र में सबसे बड़ी बढ़ोतरी में से एक
राज्यों के आंकड़ों में महाराष्ट्र का विस्तार विशेष रूप से सामने आता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में महाराष्ट्र में पीएमएनडीपी के तहत 65 डायलिसिस केंद्र स्थापित थे। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इनकी संख्या बढ़कर 158 हो गई। यानी एक साल में महाराष्ट्र में 93 डायलिसिस केंद्रों की बढ़ोतरी हुई। यह करीब 143% की वृद्धि है। महाराष्ट्र का आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में मुंबई, पुणे, नागपुर, नाशिक और अन्य बड़े शहरों के साथ-साथ ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी बड़ी आबादी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर करती है। जिला स्तर पर डायलिसिस केंद्रों का विस्तार मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, केवल केंद्रों की संख्या बढ़ना पर्याप्त नहीं है। इन केंद्रों का नियमित संचालन, पर्याप्त मशीनों की उपलब्धता, प्रशिक्षित डायलिसिस तकनीशियन, डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता तथा मशीनों का रखरखाव भी जरूरी है।
गुजरात में सबसे बड़ा नेटवर्क
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में गुजरात में पीएमएनडीपी के तहत 282 डायलिसिस केंद्र थे। यह सूची में सबसे अधिक संख्या है। गुजरात के बाद महाराष्ट्र में 158, कर्नाटक में 214 और तमिलनाडु में 146 केंद्र दर्ज किए गए हैं। केरल में 113 और तेलंगाना में 101 केंद्र हैं। कुछ राज्यों में पिछले दो वर्षों के दौरान उल्लेखनीय विस्तार दर्ज किया गया। उदाहरण के लिए, असम में केंद्रों की संख्या 54 से बढ़कर 74 हुई। जम्मू-कश्मीर में 23 से 29 और गोवा में 16 से 18 केंद्र हुए।
राज्यवार तस्वीर क्या बताती है?
वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के आंकड़ों की तुलना करने पर अलग-अलग राज्यों में डायलिसिस नेटवर्क के विस्तार की गति अलग दिखाई देती है। आंध्र प्रदेश में केंद्र 59 से बढ़कर 61 हुए, जबकि अरुणाचल प्रदेश में संख्या 11 पर बनी रही। बिहार में 38, चंडीगढ़ में 1 और हरियाणा में 21 केंद्रों की संख्या दोनों वर्षों में समान रही। छत्तीसगढ़ में केंद्र 35 से बढ़कर 39 हुए। दिल्ली में 7 से बढ़कर 16, गोवा में 16 से 18 और जम्मू-कश्मीर में 23 से 29 केंद्र हुए। कर्नाटक में 200 से बढ़कर 214 और केरल में 111 से 113 केंद्र हुए। मध्य प्रदेश में 67 से 70, मिजोरम में 4 से 5, नागालैंड में 4 से 7 और ओडिशा में 67 से 68 केंद्र हुए। तमिलनाडु में 141 से 146 और तेलंगाना में 95 से 101 केंद्र हुए। पश्चिम बंगाल में 69 से 73 केंद्र दर्ज किए गए। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में दोनों वित्तीय वर्षों में 75 केंद्र, राजस्थान में 35 और पंजाब में 40 केंद्र दर्ज किए गए।
सिर्फ मशीन लगाना नहीं, संचालन सबसे बड़ी चुनौती
सरकार ने राज्यसभा में यह भी स्पष्ट किया है कि डायलिसिस केंद्र स्थापित करने के बाद उन्हें समय पर चालू करना संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की जिम्मेदारी है। डायलिसिस जैसी सेवा में मशीनों की उपलब्धता के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन भी जरूरी है। प्रत्येक केंद्र को डायलिसिस तकनीशियनों और अन्य आवश्यक कर्मचारियों की जरूरत होती है। मशीनों की तकनीकी स्थिति, पानी की गुणवत्ता, संक्रमण नियंत्रण, बिजली की निरंतर उपलब्धता और आपात स्थिति में चिकित्सकीय सहायता जैसी व्यवस्थाएं भी डायलिसिस केंद्रों के सुरक्षित संचालन के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसी वजह से सरकार ने स्पष्ट किया है कि पर्याप्त प्रशिक्षित मानव संसाधन, जिसमें डायलिसिस तकनीशियन भी शामिल हैं, उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार तथा जहां लागू हो वहां कार्यान्वयन साझेदार की है।
सरकार गैर-संचालित केंद्रों की भी कर रही निगरानी
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पीएमएनडीपी की नियमित समीक्षा की जाती है। इसके लिए कॉमन रिव्यू मिशन CRM और वरिष्ठ अधिकारियों के दौरे का इस्तेमाल किया जाता है। यदि किसी समीक्षा के दौरान कोई डायलिसिस केंद्र गैर-संचालित पाया जाता है तो संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश को इसकी जानकारी दी जाती है और सुधारात्मक कार्रवाई के लिए कहा जाता है। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में किसी सुविधा की स्थापना और उसके वास्तविक उपयोग के बीच अंतर हो सकता है। डायलिसिस केंद्रों के मामले में मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद यदि प्रशिक्षित स्टाफ, रखरखाव या अन्य जरूरी संसाधनों की कमी हो तो मरीजों को वास्तविक लाभ नहीं मिल पाएगा।
केंद्रों की स्थापना कैसे होती है?
पीएमएनडीपी के तहत केंद्र सरकार राज्यों को सीधे मनमाने ढंग से हर स्थान पर डायलिसिस केंद्र आवंटित नहीं करती। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपने वार्षिक Programme Implementation Plans यानी PIPs में प्रस्ताव भेजे जाते हैं। इन प्रस्तावों को संबंधित क्षेत्र में उपलब्ध सुविधाओं और जरूरत के बीच मौजूद अंतर यानी gap analysis के आधार पर तैयार किया जाता है। इसके बाद इन प्रस्तावों पर National Programme Coordination Committee की बैठकों में विचार किया जाता है। स्वीकृति मिलने के बाद Record of Proceedings के माध्यम से राज्यों को मंजूरी की जानकारी दी जाती है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह तय करना है कि जहां डायलिसिस सुविधा की जरूरत अधिक है, वहां उपलब्ध स्वास्थ्य ढांचे के आधार पर केंद्र स्थापित किए जा सकें।
स्वास्थ्य राज्य का विषय, लेकिन केंद्र की बड़ी भूमिका
भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य और अस्पताल राज्य के विषय हैं। इसका अर्थ है कि राज्य सरकारें अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में प्रमुख भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तकनीकी और वित्तीय सहायता देती है। पीएमएनडीपी इसी सहयोग के तहत डायलिसिस सेवाओं को मजबूत करने का प्रयास है। इस व्यवस्था में केंद्र की भूमिका नीति, तकनीकी सहयोग और वित्तीय सहायता तक महत्वपूर्ण है, जबकि स्थानीय स्तर पर केंद्रों को चालू रखना और मानव संसाधन उपलब्ध कराना राज्यों की जिम्मेदारी है।
किडनी मरीजों के लिए क्यों अहम है यह योजना?
किडनी की गंभीर बीमारी में डायलिसिस लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया हो सकती है। मरीज को नियमित अंतराल पर उपचार की जरूरत होती है। ऐसे में घर से बहुत दूर स्थित केंद्र तक बार-बार यात्रा करना मरीज और उसके परिवार के लिए कठिन हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह चुनौती और बड़ी हो सकती है। कई परिवारों के लिए इलाज के साथ आने-जाने, भोजन और देखभाल से जुड़े खर्च भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पैदा करते हैं। जिला अस्पतालों में डायलिसिस सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को अपने क्षेत्र के नजदीक उपचार मिलने की संभावना बढ़ती है। मुफ्त सेवा पात्र मरीजों के लिए इलाज की प्रत्यक्ष लागत कम करने में भी मदद कर सकती है।
आंकड़ों के पीछे सबसे बड़ा सवाल-कितने केंद्र वास्तव में सक्रिय हैं?
देश में 1,856 केंद्र और 13,535 मशीनों का नेटवर्क निश्चित रूप से बड़ा विस्तार है, लेकिन सरकार के अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केंद्रों का संचालन लगातार निगरानी का विषय है। यही वजह है कि पीएमएनडीपी की सफलता को केवल स्थापित केंद्रों की संख्या से नहीं मापा जाना चाहिए। असली प्रभाव इस बात से तय होगा कि कितने केंद्र नियमित रूप से संचालित हैं, वहां कितनी मशीनें वास्तव में इस्तेमाल हो रही हैं, मरीजों को कितने डायलिसिस सत्र उपलब्ध हो रहे हैं और क्या पर्याप्त प्रशिक्षित तकनीशियन एवं स्वास्थ्यकर्मी मौजूद हैं। सरकार ने गैर-संचालित केंद्रों की पहचान कर संबंधित राज्यों को सुधारात्मक कदम उठाने के लिए कहा है। इससे संकेत मिलता है कि योजना के अगले चरण में केवल विस्तार ही नहीं, बल्कि मौजूदा केंद्रों की operational efficiency भी महत्वपूर्ण होगी।
दो साल में राज्यों की तस्वीर
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | 2024-25 | 2025-26 |
|---|---|---|
| गुजरात | 272 | 282 |
| कर्नाटक | 200 | 214 |
| महाराष्ट्र | 65 | 158 |
| तमिलनाडु | 141 | 146 |
| केरल | 111 | 113 |
| तेलंगाना | 95 | 101 |
| उत्तर प्रदेश | 75 | 75 |
| पश्चिम बंगाल | 69 | 73 |
| मध्य प्रदेश | 67 | 70 |
| ओडिशा | 67 | 68 |
| आंध्र प्रदेश | 59 | 61 |
| असम | 54 | 74 |
| पंजाब | 40 | 40 |
| बिहार | 38 | 38 |
| राजस्थान | 35 | 35 |
| छत्तीसगढ़ | 35 | 39 |
| जम्मू-कश्मीर | 23 | 29 |
| हरियाणा | 21 | 21 |
| उत्तराखंड | 19 | 19 |
| गोवा | 16 | 18 |
पीएमएनडीपी के तहत देशभर में डायलिसिस सेवाओं का विस्तार स्वास्थ्य सेवाओं को जिला स्तर तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि स्थापित केंद्र केवल सरकारी आंकड़ों का हिस्सा न रहें, बल्कि मरीजों को नियमित और सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराएं। इसके लिए पर्याप्त प्रशिक्षित डायलिसिस तकनीशियन, डॉक्टरों और सपोर्ट स्टाफ की उपलब्धता, मशीनों का रखरखाव, संक्रमण नियंत्रण, बिजली और पानी जैसी आवश्यक सुविधाएं तथा नियमित निगरानी बेहद जरूरी होंगी। महाराष्ट्र जैसे राज्यों में जहां पिछले एक साल में केंद्रों की संख्या तेजी से बढ़ी है, वहां नए केंद्रों को पूरी क्षमता से संचालित करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा। कुल मिलाकर, 30 जून 2026 तक 751 जिलों में 1,856 हेमोडायलिसिस केंद्र और 13,535 मशीनों का नेटवर्क यह दिखाता है कि सरकारी डायलिसिस सेवाओं का दायरा देशव्यापी हो चुका है। अब इस नेटवर्क की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जरूरतमंद मरीजों को इन केंद्रों पर कितनी आसानी, नियमितता और गुणवत्ता के साथ मुफ्त डायलिसिस सेवा मिलती है।
