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महाराष्ट्र के अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक अधिकारियों को बड़ी राहत; सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार का फैसला
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के अनुपालन में महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की आयु अस्थायी रूप से 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह फैसला 31 मार्च 2026 से प्रभावी होगा। साथ ही, इस तारीख के बाद सेवानिवृत्त हुए अधिकारियों को उनकी लिखित सहमति के बाद 62 वर्ष की आयु पूरी होने तक पुनः सेवा में बहाल करने का भी प्रावधान किया गया है। हालांकि, यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन रहेगा।
Priyanka Gaikwad07 अग. 2026, 05:10 PM IST

मुंबई | Mumbai : महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उनकी सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी है। विधि एवं न्याय विभाग द्वारा 5 अगस्त 2026 को जारी शासनादेश के अनुसार यह निर्णय 31 मार्च 2026 से प्रभावी माना जाएगा। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के अनुपालन में उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित रिट याचिका (सिविल) क्रमांक 1022/1989 की सुनवाई के दौरान 22 जुलाई 2026 को न्यायालय ने सभी राज्य सरकारों और संबंधित उच्च न्यायालयों को न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के संबंध में आपसी सहमति से निर्णय लेने का निर्देश दिया था।
इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने पर अपनी सहमति दी, जिसके आधार पर राज्य सरकार ने यह शासनादेश जारी किया। शासनादेश के अनुसार, 31 मार्च 2026 से राज्य के सभी अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष होगी। इससे पहले 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों को अब अतिरिक्त दो वर्ष तक सेवा देने का अवसर मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे न्यायपालिका में अनुभवी अधिकारियों की सेवाएं अधिक समय तक उपलब्ध रहेंगी, न्यायिक कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी और लंबित मामलों के निपटारे में भी तेजी आएगी।
इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने पर अपनी सहमति दी, जिसके आधार पर राज्य सरकार ने यह शासनादेश जारी किया। शासनादेश के अनुसार, 31 मार्च 2026 से राज्य के सभी अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष होगी। इससे पहले 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों को अब अतिरिक्त दो वर्ष तक सेवा देने का अवसर मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे न्यायपालिका में अनुभवी अधिकारियों की सेवाएं अधिक समय तक उपलब्ध रहेंगी, न्यायिक कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी और लंबित मामलों के निपटारे में भी तेजी आएगी।
इस निर्णय का लाभ उन न्यायिक अधिकारियों को भी मिलेगा, जो 31 मार्च 2026 या उसके बाद सेवानिवृत्त हुए हैं। ऐसे अधिकारियों की लिखित सहमति प्राप्त होने के बाद उन्हें पुनः सेवा में बहाल किया जाएगा और 62 वर्ष की आयु पूरी होने तक वे अपने पद पर कार्यरत रह सकेंगे। इससे हाल ही में सेवानिवृत्त हुए कई अधिकारियों को दोबारा सेवा का अवसर मिलेगा। हालांकि, महाराष्ट्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट में लंबित रिट याचिका (सिविल) क्रमांक 1022/1989 के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। न्यायालय का अंतिम फैसला आने के बाद उसी के अनुरूप आगे की प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसलिए फिलहाल यह व्यवस्था अंतरिम स्वरूप में लागू की गई है।
यह निर्णय राज्य के जिला एवं सत्र न्यायालयों, अतिरिक्त जिला न्यायालयों, दीवानी न्यायालयों, फौजदारी न्यायालयों, परिवार न्यायालयों तथा अन्य अधीनस्थ न्यायालयों में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों पर लागू होगा। इससे न्यायालयों में अनुभवी न्यायाधीशों की उपलब्धता बढ़ेगी और रिक्त पदों की समस्या को कुछ हद तक कम करने में मदद मिलेगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अनुभवी न्यायिक अधिकारियों का कार्यकाल बढ़ने से न्यायिक निर्णयों की गुणवत्ता, न्यायिक प्रक्रिया में निरंतरता और लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
विशेष रूप से राज्य के विभिन्न जिला न्यायालयों में लंबित दीवानी और आपराधिक मामलों के निस्तारण में इससे गति आने की संभावना जताई जा रही है। महाराष्ट्र सरकार ने इस संबंध में जारी शासनादेश को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया है। इसके साथ ही बॉम्बे हाईकोर्ट, सभी जिला एवं सत्र न्यायालयों, न्यायिक प्रशिक्षण संस्थान, वित्त विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई और आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश भी जारी किए गए हैं। यह शासनादेश राज्यपाल के आदेश से जारी किया गया है और इसकी डिजिटल हस्ताक्षरित प्रति भी उपलब्ध कराई गई है|
