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महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों में नवजातों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल, अमरावती अग्निकांड के बाद NHRC का नोटिस

अमरावती अस्पताल अग्निकांड: 3 नवजातों की मौत के बाद NHRC का बड़ा कदम, महाराष्ट्र में सरकारी अस्पतालों की Fire Safety पर सवाल, महाराष्ट्र के अमरावती स्थित जिला महिला अस्पताल में नवजात शिशुओं के इलाज के लिए बनाए गए Sick Newborn Care Unit (SNCU) में लगी आग ने सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 24 अगस्त 2026 को हुई इस घटना में तीन नवजातों की मौत हुई, जबकि चार अन्य बच्चे घायल हुए।

Kalpana Gautam01 सित. 2026, 07:03 PM IST
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महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों में नवजातों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल, अमरावती अग्निकांड के बाद NHRC का नोटिस
महाराष्ट्र के अमरावती स्थित जिला महिला अस्पताल में नवजात शिशुओं के इलाज के लिए बनाए गए Sick Newborn Care Unit (SNCU) में लगी आग ने सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 24 अगस्त 2026 को हुई इस घटना में तीन नवजातों की मौत हुई, जबकि चार अन्य बच्चे घायल हुए। घटना के बाद अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने सरकार से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में घायल नवजातों की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति और मृतक बच्चों के परिवारों को घोषित मुआवजे के वितरण की जानकारी भी शामिल करने को कहा गया है।

कैसे हुआ हादसा?
रिपोर्टों के अनुसार, 24 अगस्त की तड़के अमरावती जिला महिला अस्पताल के नवजात गहन चिकित्सा क्षेत्र में आग लगी। आग अस्पताल की उस यूनिट में लगी जहां बेहद गंभीर और समय से पहले जन्मे बच्चों का इलाज चल रहा था। शुरुआती रिपोर्टों में आग की वजह को तकनीकी खराबी और ventilator/medical equipment से जुड़ी घटना बताया गया। NHRC की आधिकारिक प्रेस रिलीज़ में भी मीडिया रिपोर्ट के हवाले से ventilator machine में blast की बात दर्ज है। हालांकि, आग लगने का अंतिम कारण अभी जांच के अधीन है। स्थानीय अग्निशमन अधिकारियों ने electrical short circuit की संभावना पर भी सवाल उठाए हैं। इसलिए जांच पूरी होने से पहले आग के कारण को निश्चित रूप से ventilator blast बताना उचित नहीं होगा।

तीन नवजातों की मौत, चार घायल
NHRC के अनुसार इस घटना में तीन नवजातों की मौत और चार अन्य के घायल होने की सूचना मिली थी। आयोग ने इसी रिपोर्ट के आधार पर मामले में suo motu cognizance लिया और कहा कि यदि रिपोर्ट में सामने आए तथ्य सही हैं, तो यह मानवाधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल उठाता है। घटना के समय SNCU में मौजूद बच्चों को बचाने के लिए अस्पताल के कर्मचारियों और दमकल कर्मियों ने rescue operation चलाया। रिपोर्टों के मुताबिक आग को एक सीमित हिस्से में नियंत्रित किया गया और प्रभावित बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कार्रवाई की गई।
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NHRC ने महाराष्ट्र सरकार से क्या पूछा?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को नोटिस जारी करते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
इस रिपोर्ट में मुख्य रूप से—
- घायल चार नवजातों की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति
- मृत बच्चों के परिवारों को घोषित मुआवजे की स्थिति
- मुआवजे का भुगतान हुआ या नहीं
- घटना से जुड़े प्रशासनिक और सुरक्षा पहलू की जानकारी मांगी गई है।
NHRC ने राज्य सरकार को जवाब के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

मुआवजे का ऐलान
घटना के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मृत नवजातों के परिवारों के लिए ₹5 लाख प्रति परिवार आर्थिक सहायता की घोषणा की थी। साथ ही घायल बच्चों के इलाज का खर्च सरकार द्वारा वहन किए जाने की बात कही गई थी। अब NHRC ने सरकार से इस मुआवजे के वास्तविक वितरण की स्थिति भी रिपोर्ट में बताने को कहा है।

Fire Audit को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
इस हादसे के बाद सबसे गंभीर सवाल अस्पताल की fire और electrical safety व्यवस्था को लेकर सामने आया है। कुछ अधिकारियों के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया कि अस्पताल का fire audit renewal के दौर में था और electrical audit भी नवीनीकरण के लिए लंबित था। वहीं अमरावती जिला प्रशासन की ओर से यह दावा किया गया कि अस्पताल में नियमित fire audits हुए थे और नए audit के लिए प्रक्रिया शुरू की जा चुकी थी। यानी audit को लेकर अलग-अलग अधिकारियों के बयान सामने आए हैं। यही विरोधाभास अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों की बड़ी तस्वीर
अमरावती की घटना को सिर्फ एक अस्पताल तक सीमित करके देखना भी पर्याप्त नहीं होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के 530 operational public health institutions में से 528 में fire audits किए जाने की जानकारी सरकारी आंकड़ों में थी। लेकिन इनमें fire-safety systems की installation और Fire NOC की स्थिति अलग-अलग थी—रिपोर्ट के अनुसार 442 संस्थानों में safety system installation पूरा हुआ था और 372 को Fire NOC मिला था। 

यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि — “Fire audit हुआ या नहीं?”
सवाल यह भी है कि — “Audit में जो कमियां मिलीं, क्या उन्हें वास्तव में दूर किया गया?”

और उससे भी बड़ा सवाल— “क्या अस्पताल में लगे fire alarm, sprinkler, electrical systems और emergency evacuation व्यवस्था संकट की घड़ी में वास्तव में काम करती है?”

हादसे के बाद अब क्या कदम?
 अमरावती प्रशासन ने जिले के अस्पतालों में comprehensive fire audits कराने की दिशा में कदम उठाने की जानकारी दी है। इसके अलावा, हादसे के बाद नए NICU सुविधाओं को तैयार करने और fire-safety विशेषज्ञों की मदद लेने की योजनाओं की भी रिपोर्ट सामने आई है। 1 सितंबर को PWD की अलग जांच शुरू किए जाने की भी जानकारी सामने आई है, क्योंकि fire audit से जुड़े पहलुओं पर सवाल उठे हैं।

सबसे बड़ा सवाल—क्या नवजातों के लिए अस्पताल पर्याप्त सुरक्षित हैं?
अमरावती का SNCU कोई सामान्य वार्ड नहीं है।
यहां ऐसे बच्चे भर्ती होते हैं जिन्हें चौबीसों घंटे monitoring, oxygen, ventilators, warmers और अन्य life-support equipment की जरूरत हो सकती है।
ऐसे में आग लगने की स्थिति में इन बच्चों को सामान्य मरीजों की तरह तुरंत बाहर निकालना आसान नहीं होता।
यही वजह है कि neonatal units में fire safety का महत्व और भी बढ़ जाता है।
अमरावती की घटना अब महाराष्ट्र के लिए एक चेतावनी की तरह देखी जा रही है।
सवाल सिर्फ तीन नवजातों की मौत का नहीं है...
सवाल यह है कि अगर किसी सरकारी अस्पताल के ICU या SNCU में अचानक आग लग जाए तो—
क्या fire alarm तुरंत बजेगा?
क्या sprinkler system काम करेगा?
क्या electrical wiring सुरक्षित है?
क्या staff को neonatal evacuation की पर्याप्त training है?
क्या fire audit में सामने आई कमियों को समय पर ठीक किया जाता है?

और सबसे अहम— “क्या हमारे सरकारी अस्पताल उन मरीजों के लिए वास्तव में सुरक्षित हैं, जो खुद अपनी जान बचाने के लिए कुछ कर भी नहीं सकते?” अमरावती मामले में NHRC की जांच और राज्य सरकार की रिपोर्ट से इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। लेकिन जब तक जांच पूरी नहीं होती, आग के कारण या किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि तीन नवजातों की मौत ने महाराष्ट्र की hospital fire-safety व्यवस्था को एक गंभीर परीक्षा के सामने खड़ा कर दिया है।