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महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026: 28 अगस्त से लागू होगा नया धर्मांतरण कानून

महाराष्ट्र में धर्मांतरण को लेकर नया धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026 चर्चा में है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब राज्य सरकार ने इसे 28 अगस्त 2026 से लागू करने की तारीख तय की है। इस कानून का उद्देश्य बल, धोखे, धमकी, प्रलोभन या अनुचित प्रभाव के जरिए कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है। लेकिन कानून में स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन के लिए भी नोटिस और घोषणा की प्रक्रिया तय की गई है। आखिर इस नए कानून में क्या प्रावधान हैं, कितनी सजा हो सकती है और आम नागरिक पर इसका क्या असर पड़ेगा।

Vindhya Dubey21 अग. 2026, 08:13 PM IST
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महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026: 28 अगस्त से लागू होगा नया धर्मांतरण कानून

मुंबई, 21 अगस्त 2026: महाराष्ट्र में धार्मिक धर्मांतरण को लेकर लंबे समय से चर्चा में रहा महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026 अब लागू होने की अंतिम प्रक्रिया में है। महाराष्ट्र सरकार ने अधिनियम को 28 अगस्त 2026 से प्रभावी करने की तारीख अधिसूचित की है। इससे पहले विधेयक को महाराष्ट्र विधानसभा और विधान परिषद से मंजूरी मिली थी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 31 जुलाई 2026 को इसे मंजूरी दी थी।

कानून का उद्देश्य क्या है?

अधिनियम का आधिकारिक उद्देश्य एक ओर धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करना और दूसरी ओर अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाना है। विधेयक में कहा गया है कि बल, धोखे, गलत प्रस्तुतीकरण, धमकी, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन या अन्य कपटपूर्ण तरीकों से कराया गया धर्मांतरण अवैध माना जाएगा। कानून में “प्रलोभन” की परिभाषा काफी व्यापक रखी गई है। इसमें उपहार या आर्थिक लाभ, नौकरी, धार्मिक संस्था द्वारा मुफ्त शिक्षा, शादी का वादा, बेहतर जीवनशैली और “दिव्य उपचार” जैसी चीजें शामिल हैं।

कौन-सा धर्मांतरण अपराध माना जाएगा?

अधिनियम की धारा 3 के अनुसार किसी व्यक्ति को दूसरे धर्म में परिवर्तित करने या ऐसा करने में सहायता करने पर रोक है, यदि इसके लिए निम्न माध्यमों का इस्तेमाल किया गया हो: बल या शारीरिक दबाव, धमकी, जबरदस्ती या मनोवैज्ञानिक दबाव, धोखा या छल, गलत जानकारी या गलत प्रस्तुतीकरण, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन, अन्य कपटपूर्ण साधन। कानून विवाह या विवाह के वादे के माध्यम से किए गए धर्मांतरण को भी दायरे में रखता है, यदि उसमें ऊपर बताए गए अवैध साधनों का इस्तेमाल हुआ हो।

स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने पर क्या प्रक्रिया होगी?

कानून में स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन के लिए भी एक औपचारिक प्रक्रिया रखी गई है। धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति और धर्म परिवर्तन का आयोजन करने वाले व्यक्ति या संस्था को प्रस्तावित धर्म परिवर्तन से 60 दिन पहले सक्षम प्राधिकारी को नोटिस देना होगा। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी प्रस्तावित धर्म परिवर्तन की सूचना अपने कार्यालय तथा संबंधित स्थानीय निकाय के कार्यालय में प्रदर्शित करेगा और 30 दिनों के भीतर आपत्तियां मांगी जा सकती हैं। जरूरत पड़ने पर पुलिस के माध्यम से जांच भी कराई जा सकती है। धर्म परिवर्तन के बाद परिवर्तित व्यक्ति और आयोजन करने वाले व्यक्ति या संस्था को 21 दिनों के भीतर घोषणा भी जमा करनी होगी। इसमें नाम, उम्र, पता, माता-पिता, मूल धर्म, नया धर्म, धर्म परिवर्तन की तारीख और स्थान जैसी जानकारी शामिल होगी।

सजा कितनी होगी?

कानून में अपराध की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग दंड का प्रावधान है।

  • सामान्य अवैध धर्मांतरण: अधिकतम 7 वर्ष की जेल और ₹1 लाख तक जुर्माना।
  • नाबालिग, महिला, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति या अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति से संबंधित मामला: अधिकतम 7 वर्ष की जेल और ₹5 लाख तक जुर्माना।
  • सामूहिक धर्मांतरण: अधिकतम 7 वर्ष की जेल और ₹5 लाख तक जुर्माना।
  • दोबारा अपराध करने पर: अधिकतम 10 वर्ष की जेल और ₹7 लाख तक जुर्माना हो सकता है।

कानून के तहत अपराध संज्ञेय (cognizable) और गैर-जमानती (non-bailable) होंगे तथा मामलों की सुनवाई Sessions Court में होगी। अधिनियम के अनुसार धर्म परिवर्तन से संबंधित शिकायत परिवर्तित व्यक्ति के अलावा उसके माता-पिता, भाई-बहन या खून, विवाह अथवा गोद लेने के संबंध से जुड़े अन्य रिश्तेदार पुलिस में दर्ज करा सकते हैं। कानून पुलिस को निर्धारित परिस्थितियों में स्वतः संज्ञान लेने की शक्ति भी देता है।

संस्थाओं पर भी कार्रवाई

यदि कोई संस्था या संगठन कानून का उल्लंघन करता है तो उसकी संबंधित कानूनी पंजीकरण व्यवस्था के तहत रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है। संस्था के जिम्मेदार लोगों के लिए 7 वर्ष तक की जेल और ₹5 लाख तक जुर्माने का प्रावधान है। ऐसी संस्था को राज्य सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता या अनुदान भी नहीं दिया जाएगा। अधिनियम का एक महत्वपूर्ण प्रावधान burden of proof से जुड़ा है। यदि अवैध धर्मांतरण का मामला सामने आता है तो यह साबित करने की जिम्मेदारी उस व्यक्ति पर होगी जिसने धर्म परिवर्तन कराया या उसमें सहायता की कि धर्म परिवर्तन कानून का उल्लंघन करते हुए नहीं कराया गया था।

विवाह और बच्चों को लेकर क्या प्रावधान हैं?

यदि किसी विवाह का एकमात्र उद्देश्य अवैध धर्मांतरण करना पाया जाता है तो अदालत उस विवाह को शून्य (null and void) घोषित कर सकती है। ऐसे अवैध धर्मांतरण से जुड़े विवाह या वैवाहिक संबंध से जन्मे बच्चे के संबंध में कानून में विशेष प्रावधान हैं। बच्चे को विवाह से पहले मां के धर्म से संबंधित माना जाएगा; साथ ही बच्चे के माता-पिता की संपत्ति में लागू उत्तराधिकार कानूनों के अनुसार अधिकार और भरण-पोषण का अधिकार सुरक्षित रहेगा। बच्चे की अभिरक्षा मां के पास रहने का प्रावधान है, हालांकि अदालत अलग निर्णय ले सकती है।

28 अगस्त से पहले क्या स्थिति है?

राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद भी अधिनियम को प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार को अलग से commencement notification जारी करना था। 17 अगस्त की अधिसूचना के जरिए 28 अगस्त 2026 को प्रभावी होने की तारीख तय की गई। इसी वजह से पुणे पुलिस द्वारा अगस्त में दो मामलों में इस नए कानून की धाराएं लगाने के बाद बाद में उन्हें हटाना पड़ा। पुलिस ने माना कि कानून की प्रभावी तारीख 28 अगस्त निर्धारित की गई थी, इसलिए उससे पहले इन धाराओं का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता था।


महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026 अब कानून बन चुका है, लेकिन 21 अगस्त 2026 को इसके प्रावधान अभी लागू नहीं हुए हैं। 28 अगस्त 2026 से यह प्रभावी होगा। इसका मुख्य लक्ष्य बल, धोखे, प्रलोभन, धमकी, अनुचित प्रभाव और अन्य अवैध तरीकों से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है। कानून में स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन के लिए 60 दिन की पूर्व सूचना और धर्म परिवर्तन के बाद घोषणा जैसी प्रक्रियाएं भी निर्धारित की गई हैं। यह कानून किसी व्यक्ति के स्वेच्छा से धर्म मानने या बदलने को सामान्य रूप से अपराध घोषित नहीं करता; कानून का निशाना वह धर्मांतरण है जिसे अधिनियम में परिभाषित अवैध साधनों से कराया गया हो। हालांकि, स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन के लिए भी कानून में अनिवार्य नोटिस और घोषणा की प्रक्रिया रखी गई है।