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महाराष्ट्र में हाउसिंग सोसाइटियों के नए नियम लागू: जानिए आपके मेंटेनेंस और जेब पर क्या पड़ेगा असर!

महाराष्ट्र के लाखों फ्लैट धारकों और सोसाइटी मैनेजमेंट के लिए बड़े बदलाव का नया दौर शुरू हो गया है! राज्य सरकार ने 'महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव सोसाइटीज (अमेंडमेंट) रूल्स, 2026' के जरिए हाउसिंग सोसाइटियों के लिए अलग और सख्त चैप्टर लागू कर दिया है। सर्विस चार्ज, सिंकिंग फंड और पेनल्टी ब्याज को लेकर बने ये नए नियम आपकी सोसाइटी के कामकाज को पूरी तरह बदलने वाले हैं

Sonali08 अग. 2026, 06:47 PM IST
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महाराष्ट्र में हाउसिंग सोसाइटियों के नए नियम लागू: जानिए आपके मेंटेनेंस और जेब पर क्या पड़ेगा असर!

मुंबई।

महाराष्ट्र की सहकारी हाउसिंग सोसाइटियों में रहने वाले लाखों फ्लैट मालिकों और सोसाइटी मैनेजमेंट के लिए अहम कानूनी बदलाव सामने आया है। महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव सोसाइटीज रूल्स, 1961 में संशोधन करते हुए सहकारी आवास समितियों के लिए अलग और विस्तृत नियमों का ढांचा तैयार किया है। महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव सोसाइटीज (अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 की अधिसूचना 18 जून 2026 को जारी की गई और इसे 22 जून 2026 के महाराष्ट्र शासन राजपत्र में प्रकाशित किया गया।

इस संशोधन के जरिए महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव सोसाइटीज रूल्स में नया Chapter XI-B जोड़ा गया है, जिसमें Rule 106C-1 से Rule 106C-14 तक आवासीय सहकारी समितियों से जुड़े अलग-अलग विषयों को विस्तार से निर्धारित किया गया है। पेशेवर कानूनी और सहकारी क्षेत्र के विश्लेषण भी इसे महाराष्ट्र की हाउसिंग सोसाइटियों के लिए एक समर्पित नियम व्यवस्था के रूप में बताते हैं।


क्या बदला है हाउसिंग सोसाइटियों के लिए?

नए नियमों में हाउसिंग सोसाइटी के गठन, नाम आरक्षण, बैंक खाता खोलने की अनुमति, पंजीकरण, सदस्यता, नॉमिनेशन, प्रोविजनल मेंबरशिप, सोसाइटी के फंड, मेंटेनेंस और अन्य चार्ज, मैनेजमेंट, बैठकों तथा बकाया राशि की वसूली जैसी व्यवस्थाओं को अलग-अलग नियमों में रखा गया है। राजपत्र के अनुसार, हाउसिंग सोसाइटियों के लिए Rule 106C-1 से विशेष अध्याय शुरू होता है और इसके तहत कई पुराने सामान्य नियम हाउसिंग सोसाइटियों पर लागू नहीं होंगे।


मेंटेनेंस और सर्विस चार्ज पर बड़ा असर

नए Rule 106C-12 में यह स्पष्ट किया गया है कि सोसाइटी किन मदों में सदस्यों या यूनिट धारकों से राशि वसूल सकती है। इनमें सर्विस चार्ज, प्रॉपर्टी टैक्स, पानी का शुल्क, लिफ्ट की मरम्मत और रखरखाव, कार पार्किंग शुल्क, बकाया राशि पर ब्याज, लोन की किस्त और ब्याज, नॉन-ऑक्यूपेंसी चार्ज, इंश्योरेंस, लीज रेंट, नॉन-एग्रीकल्चर टैक्स और विभिन्न फंडों में योगदान शामिल हैं। इसके अलावा जनरल बॉडी से मंजूर अन्य शुल्क भी लगाए जा सकते हैं, लेकिन वे अधिनियम और नियमों के विपरीत नहीं होने चाहिए।


सर्विस चार्ज सभी फ्लैटों में बराबर

नए प्रावधान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सर्विस चार्ज के बंटवारे से जुड़ा है। Rule 106C-12 के अनुसार सर्विस चार्ज को सोसाइटी की यूनिट या फ्लैटों की संख्या के आधार पर बराबर बांटा जाना है। यानी इस मद में बड़े या छोटे फ्लैट के आधार पर अलग-अलग राशि तय करने का आधार नहीं दिया गया है।

हालांकि, हर शुल्क समान तरीके से नहीं बांटा जाएगा। उदाहरण के लिए प्रॉपर्टी टैक्स स्थानीय प्राधिकरण के निर्धारण के अनुसार और कॉमन एरिया के लिए फ्लैट के कारपेट एरिया के आधार पर बांटा जाएगा। पानी का शुल्क संबंधित कनेक्शन और टैप की संख्या तथा आकार के आधार पर तय होगा। लिफ्ट से जुड़े खर्च उस भवन के यूनिट या फ्लैटों में बराबर बांटे जाएंगे, जहां लिफ्ट उपलब्ध है।


पार्किंग शुल्क पर भी जनरल बॉडी की भूमिका

कार पार्किंग शुल्क के लिए नियम में किसी एक राज्यव्यापी रकम को तय नहीं किया गया है। इसके बजाय पार्किंग चार्ज की दर जनरल बॉडी द्वारा तय की जाएगी। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि नए नियम ने सभी हाउसिंग सोसाइटियों के लिए पार्किंग की एक निश्चित फीस तय कर दी है।

डिफॉल्ट में ब्याज की अधिकतम सीमा 12%

मेंटेनेंस या अन्य देय राशि समय पर नहीं चुकाने पर सोसाइटी ब्याज ले सकती है, लेकिन नियम के अनुसार जनरल बॉडी द्वारा तय ब्याज साधारण ब्याज के रूप में 12 प्रतिशत सालाना से अधिक नहीं हो सकता।

नॉन-ऑक्यूपेंसी चार्ज 10% सर्विस चार्ज

नॉन-ऑक्यूपेंसी चार्ज को भी नियम में स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है। Rule 106C-12 के अनुसार यह सर्विस चार्ज का 10 प्रतिशत होगा।

इसलिए सोशल मीडिया या अन्य जगहों पर यदि यह दावा किया जाए कि नए नियमों ने नॉन-ऑक्यूपेंसी चार्ज पूरी तरह खत्म कर दिया है, तो वह दावा सही नहीं होगा। नए नियम में यह शुल्क मौजूद है और इसकी दर 10 प्रतिशत सर्विस चार्ज निर्धारित की गई है।


सिंकिंग फंड और रिपेयर फंड की न्यूनतम दर

हाउसिंग सोसाइटियों के वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। Rule 106C-11 में रिजर्व फंड, सिंकिंग फंड, रिपेयर एंड मेंटेनेंस फंड, मेजर रिपेयर फंड, एजुकेशन एंड ट्रेनिंग फंड, इलेक्शन फंड, वेलफेयर फंड, कॉर्पस फंड और जनरल बॉडी की मंजूरी से अन्य फंड बनाए रखने की व्यवस्था की गई है।

सिंकिंग फंड के लिए न्यूनतम योगदान फ्लैट की निर्माण लागत का 0.25 प्रतिशत प्रति वर्ष रखा गया है। वहीं रिपेयर एंड मेंटेनेंस फंड के लिए न्यूनतम 0.75 प्रतिशत प्रति वर्ष का प्रावधान है। दोनों के लिए निर्माण लागत उस समय की होगी जो बिल्डिंग निर्माण के दौरान हुई और आर्किटेक्ट द्वारा प्रमाणित हो।


नॉमिनेशन और सदस्य की मृत्यु के बाद प्रोविजनल मेंबरशिप

नए नियमों में नॉमिनेशन की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है। कोई सदस्य या संयुक्त सदस्य निर्धारित फॉर्म के जरिए किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को प्रोविजनल मेंबरशिप के लिए नॉमिनेट कर सकता है। संयुक्त सदस्यों के मामले में प्रत्येक सदस्य अपने हिस्से के लिए अलग नॉमिनेशन दे सकता है। नॉमिनेशन को बाद में निर्धारित प्रक्रिया के तहत बदला या रद्द भी किया जा सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य सदस्य की मृत्यु के बाद फ्लैट और सोसाइटी सदस्यता से जुड़ी प्रक्रिया को स्पष्ट करना है। हालांकि, नॉमिनी को अंतिम मालिक घोषित करने के समान अर्थ निकालना उचित नहीं होगा। नियम प्रोविजनल मेंबरशिप की प्रक्रिया निर्धारित करते हैं और उत्तराधिकार से जुड़े अंतिम अधिकार अलग कानूनी प्रक्रिया का विषय हो सकते हैं।


सेल्फ-रीडेवलपमेंट के लिए उधारी की व्यवस्था

नियमों में हाउसिंग सोसाइटी की उधारी पर भी प्रावधान किया गया है। सामान्य स्थिति में सोसाइटी की देनदारी उसकी पेड-अप शेयर कैपिटल, संचित रिजर्व फंड, जमीन और भवन के लिए सदस्यों के योगदान तथा बिल्डिंग फंड, माइनस संचित नुकसान, की कुल राशि के दस गुना से अधिक नहीं हो सकती।

सेल्फ-रीडेवलपमेंट या सेल्फ-डेवलपमेंट के समय सरकार से मान्यता प्राप्त मूल्यांकनकर्ता की रिपोर्ट के आधार पर सोसाइटी जमीन के मूल्य के दस गुने तक कर्ज ले सकती है।


सोसाइटी मैनेजमेंट की जिम्मेदारियां भी तय 

नए Chapter XI-B में सोसाइटी के प्रबंधन के लिए मॉडल बायलॉज और मैनेजिंग कमेटी की जिम्मेदारियों का ढांचा भी दिया गया है। सोसाइटी का प्रबंधन रजिस्ट्रार द्वारा मंजूर बायलॉज के तहत होगा और रजिस्ट्रार हाउसिंग सोसाइटियों के लिए मॉडल बायलॉज जारी करेगा। सोसाइटी को मॉडल बायलॉज के प्रकाशन के तीन महीने के भीतर उसे अपनाने की व्यवस्था दी गई है। मैनेजिंग कमेटी को जनरल बॉडी के फैसलों को लागू करने, वार्षिक बजट तैयार करने, वित्तीय रिकॉर्ड रखने तथा ऑडिट, मरम्मत और संपत्ति के रखरखाव को सुनिश्चित करने जैसी जिम्मेदारियां दी गई हैं।


फ्लैट मालिकों के लिए इसका मतलब क्या?

व्यावहारिक तौर पर नए नियमों से हाउसिंग सोसाइटी के सदस्यों को यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन-सा शुल्क किस आधार पर लगाया जा सकता है और उसका बंटवारा कैसे होना चाहिए। खासकर सर्विस चार्ज, पार्किंग, नॉन-ऑक्यूपेंसी चार्ज, डिफॉल्ट ब्याज, सिंकिंग फंड और रिपेयर फंड जैसे मुद्दों पर नियमों में अधिक स्पष्टता आई है।

हालांकि, हर सोसाइटी के बिल में आने वाली राशि एक जैसी नहीं होगी। कई मदों में जनरल बॉडी को दर तय करने की भूमिका दी गई है और कुछ शुल्क स्थानीय प्राधिकरण, कारपेट एरिया, यूनिटों की संख्या या अन्य निर्धारित आधार पर बांटे जाएंगे। इसलिए नए नियमों का अर्थ यह नहीं है कि हर फ्लैट मालिक का कुल मेंटेनेंस बिल एक निश्चित रकम हो जाएगा।


निष्कर्ष

महाराष्ट्र सरकार का 2026 का संशोधन सहकारी हाउसिंग सोसाइटियों के लिए नियमों को अधिक विशिष्ट और संरचित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। खास तौर पर Rule 106C-12 में शुल्क वसूली और उसके बंटवारे के नियम, 12 प्रतिशत की ब्याज सीमा, 10 प्रतिशत नॉन-ऑक्यूपेंसी चार्ज तथा Rule 106C-11 में विभिन्न फंडों की व्यवस्था आम फ्लैट मालिकों के लिए सीधे तौर पर महत्वपूर्ण है।
लेकिन किसी सोसाइटी के विवाद में केवल सामान्य नियम देखकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। संबंधित सोसाइटी के पंजीकृत बायलॉज, जनरल बॉडी के प्रस्ताव, स्थानीय प्राधिकरण के नियम और लागू अधिनियम की संबंधित धाराओं को भी देखना जरूरी हो सकता है।