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युष मेडिकल एजुकेशन में सुधार के लिए सरकार सक्रिय, उत्तराखंड ने 2026-27 के लिए नहीं भेजा प्रस्ताव

भारत में आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के अनुरूप विकसित करने के लिए केंद्र सरकार लगातार सुधारात्मक कदम उठा रही है। चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, नए आयुष शिक्षण संस्थानों की स्थापना को प्रोत्साहित करने और अनुसंधान गतिविधियों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से आयुष मंत्रालय विभिन्न स्तरों पर काम कर रहा है। मंत्रालय ने राज्यसभा में जानकारी दी कि पिछले तीन वर्षों के दौरान आयुष चिकित्सा शिक्षा को अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए गए हैं।

Vindhya Dubey05 अग. 2026, 04:43 PM IST
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युष मेडिकल एजुकेशन में सुधार के लिए सरकार सक्रिय, उत्तराखंड ने 2026-27 के लिए नहीं भेजा प्रस्ताव

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने संसद में लिखित उत्तर के माध्यम से बताया कि राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM) और राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (NCH) के जरिए आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी शिक्षा के मानकों में सुधार किया जा रहा है। इन दोनों नियामक संस्थाओं का गठन क्रमशः राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग अधिनियम, 2020 और राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग अधिनियम, 2020 के तहत किया गया है।

आयुष शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष फोकस

आयुष मंत्रालय के अनुसार पिछले तीन वर्षों में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई नीतिगत और प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक पाठ्यक्रम, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था और बेहतर क्लिनिकल एक्सपोजर उपलब्ध कराना है। सरकार का मानना है कि यदि आयुष चिकित्सा शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जाता है, तो इससे न केवल देश में बेहतर आयुष चिकित्सक तैयार होंगे बल्कि भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की वैश्विक स्वीकार्यता भी बढ़ेगी। राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM) आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध चिकित्सा शिक्षा को विनियमित करता है, जबकि राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (NCH) होम्योपैथी चिकित्सा शिक्षा के मानकों की निगरानी करता है। दोनों आयोगों का उद्देश्य पारदर्शी नियमन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संस्थानों में बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

नए आयुष कॉलेज खोलने की जिम्मेदारी राज्यों की

आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मुख्य रूप से राज्यों का विषय है। इसलिए नए आयुष कॉलेज, मेडिकल संस्थान और अन्य शिक्षण संस्थानों की स्थापना का प्राथमिक दायित्व संबंधित राज्य सरकारों का होता है। हालांकि केंद्र सरकार राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है। यह सहायता विशेष रूप से उन राज्यों के लिए उपलब्ध है जहां सरकारी क्षेत्र में आयुष शिक्षण संस्थानों की संख्या पर्याप्त नहीं है। राज्य सरकारों को इस सहायता का लाभ उठाने के लिए अपनी वार्षिक कार्ययोजना (State Annual Action Plan-SAAP) तैयार कर केंद्र सरकार को भेजनी होती है। प्रस्तावों का मूल्यांकन राष्ट्रीय आयुष मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाता है और पात्र परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

उत्तराखंड ने नहीं भेजा नया प्रस्ताव

मंत्रालय ने संसद में बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उत्तराखंड सरकार ने राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत किसी नए आयुष शैक्षणिक संस्थान की स्थापना के लिए कोई प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया है। इस कारण फिलहाल केंद्र सरकार के पास उत्तराखंड में नया आयुष कॉलेज स्थापित करने से संबंधित कोई योजना विचाराधीन नहीं है। मंत्रालय ने संकेत दिया कि यदि भविष्य में राज्य सरकार प्रस्ताव भेजती है तो राष्ट्रीय आयुष मिशन के प्रावधानों के अनुसार उस पर विचार किया जा सकता है।

उत्तराखंड में पहले से संचालित है आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान

आयुष मंत्रालय ने यह भी बताया कि उत्तराखंड में केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) का एक प्रमुख अनुसंधान केंद्र पहले से कार्यरत है। यह क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (Regional Ayurveda Research Institute-RARI) रानीखेत (ताड़ीखेत) में स्थित है। यह संस्थान आयुर्वेद से जुड़े विभिन्न वैज्ञानिक अनुसंधान, औषधीय पौधों पर अध्ययन, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के वैज्ञानिक मूल्यांकन और स्वास्थ्य संबंधी शोध कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। CCRAS देशभर में आयुर्वेद आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने वाली प्रमुख स्वायत्त संस्था है, जो आयुष मंत्रालय के अधीन कार्य करती है।

नए अनुसंधान संस्थान की फिलहाल कोई योजना नहीं

संसद में दिए गए उत्तर के अनुसार वर्तमान समय में उत्तराखंड में किसी नए आयुष अनुसंधान संस्थान की स्थापना का कोई प्रस्ताव नहीं है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अभी केवल रानीखेत स्थित क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान ही राज्य में कार्यरत है। हालांकि भविष्य में आवश्यकता और राज्यों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर नए अनुसंधान संस्थानों पर विचार किया जा सकता है।

आयुष शिक्षा और अनुसंधान को मजबूत करने की दीर्घकालिक रणनीति

केंद्र सरकार का उद्देश्य केवल नए संस्थान खोलना नहीं है, बल्कि मौजूदा आयुष शिक्षा व्यवस्था को भी अधिक सक्षम बनाना है। इसके तहत शिक्षण संस्थानों में आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास, डिजिटल शिक्षा, शोध गतिविधियों को प्रोत्साहन, गुणवत्तापूर्ण फैकल्टी, अस्पतालों में बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं और छात्रों के लिए व्यावहारिक शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियां भारत की समृद्ध विरासत हैं। यदि इनकी शिक्षा और अनुसंधान को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाए तो ये स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

राष्ट्रीय आयुष मिशन की अहम भूमिका

राष्ट्रीय आयुष मिशन के माध्यम से देशभर में आयुष कॉलेजों, अस्पतालों, डिस्पेंसरी, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और अन्य स्वास्थ्य ढांचों के विकास के लिए राज्यों को वित्तीय सहायता दी जा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि जिन क्षेत्रों में आयुष शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है, वहां नए संस्थान स्थापित कर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि आयुष शिक्षा के मानकों में सुधार, अनुसंधान गतिविधियों का विस्तार और आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ बेहतर समन्वय भविष्य में भारत को पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।