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यूपी में महिला सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, मातृत्व अवकाश के बीच 2 साल की बाध्यता खत्म

उत्तर प्रदेश की महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए योगी सरकार ने मातृत्व अवकाश के नियमों में अहम बदलाव किया है। अब दूसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश लेने से पहले दोनों बच्चों के बीच दो साल का अंतर होना अनिवार्य नहीं रहेगा। यह बदलाव हाल में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के महत्वपूर्ण फैसले के बाद किया गया है।

Samant Dubey23 अग. 2026, 11:31 AM IST
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यूपी में महिला सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, मातृत्व अवकाश के बीच 2 साल की बाध्यता खत्म
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने महिला सरकारी कर्मचारियों के मातृत्व अवकाश को लेकर लागू एक महत्वपूर्ण शर्त में बदलाव कर राहत दी है। सरकार ने दूसरे मातृत्व अवकाश के लिए पहले से लागू दो साल के अंतर की अनिवार्यता को हटाने का निर्णय लिया है। इसका मतलब है कि यदि किसी महिला कर्मचारी की दूसरी गर्भावस्था पहली प्रसूति के दो साल के भीतर होती है, तो केवल कम अंतर होने के आधार पर उसे मातृत्व अवकाश से वंचित नहीं किया जा सकेगा।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदला नियम
इस बदलाव की पृष्ठभूमि में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ का 10 अगस्त 2026 का फैसला महत्वपूर्ण रहा। अदालत ने कहा था कि महिला सरकारी कर्मचारी को पहली मातृत्व छुट्टी के दो साल के भीतर दूसरी गर्भावस्था के लिए मातृत्व अवकाश लेने से वैधानिक रूप से नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने लखनऊ के कल्याण सिंह कैंसर संस्थान की एक कर्मचारी को 180 दिन का मातृत्व अवकाश देने का निर्देश भी दिया था। अदालत के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अपनाए गए Maternity Benefit Act, 1961 के प्रावधानों को केवल वित्तीय हस्तपुस्तिका के किसी विपरीत प्रावधान के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता।
पहले क्या था नियम?
उत्तर प्रदेश के सरकारी अवकाश नियमों में मातृत्व अवकाश की अवधि 180 दिन तक निर्धारित है। पुराने प्रावधान में दोबारा मातृत्व अवकाश के लिए पिछली मातृत्व छुट्टी समाप्त होने के बाद दो साल का अंतर पूरा होने की शर्त थी। उपलब्ध सरकारी नियम दस्तावेज में यह भी प्रावधान दर्ज है कि दो या उससे अधिक जीवित बच्चों वाली महिला सरकारी कर्मचारी को मातृत्व अवकाश नहीं दिया जाता था।
अब सरकार के ताजा बदलाव का मुख्य असर दो मातृत्व अवकाशों के बीच दो साल के अंतर वाली शर्त पर है। इसलिए इसे यह समझना जरूरी है कि सरकार ने मातृत्व अवकाश की सभी पात्रता शर्तें समाप्त नहीं की हैं।
महिला कर्मचारियों को क्या फायदा होगा?
नए बदलाव से उन महिला सरकारी कर्मचारियों को सबसे अधिक राहत मिलेगी जिनकी दूसरी गर्भावस्था पहली संतान के जन्म के दो साल के भीतर होती है। पहले ऐसी स्थिति में विभागीय स्तर पर दो साल की शर्त के आधार पर अवकाश को लेकर विवाद या अस्वीकृति की स्थिति बन सकती थी।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब इस तरह के मामलों में महिला कर्मचारियों के मातृत्व अधिकार को अधिक स्पष्ट आधार मिलेगा। सरकार का यह कदम कार्यरत महिलाओं को गर्भावस्था और नौकरी के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मददगार माना जा रहा है।
फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
मातृत्व अवकाश सिर्फ छुट्टी का विषय नहीं है, बल्कि महिला कर्मचारी के स्वास्थ्य, प्रसव और नवजात बच्चे की देखभाल से जुड़ा महत्वपूर्ण सेवा-अधिकार है। हाईकोर्ट के फैसले ने भी इसी संदर्भ में वैधानिक मातृत्व लाभ को प्राथमिकता दी थी। अब सरकार द्वारा दो साल के अंतर की शर्त हटाने से महिला कर्मचारियों को इस अधिकार का लाभ लेने में आने वाली एक बड़ी प्रशासनिक बाधा दूर हो गई है।
नोट: उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नया बदलाव मुख्य रूप से दो मातृत्व अवकाशों के बीच दो साल की अनिवार्य अवधि से संबंधित है। अन्य पात्रता शर्तों को समाप्त किए जाने का दावा इस खबर में नहीं किया जा रहा है।