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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर राष्ट्रपति देंगी 2025 के राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार

राष्ट्रपति 7 अगस्त को नई दिल्ली में 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में वर्ष 2025 के राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान करेंगी। यह सम्मान देश के उत्कृष्ट बुनकरों और शिल्पकारों को उनकी कला, नवाचार और हथकरघा परंपरा को आगे बढ़ाने के योगदान के लिए दिया जाएगा।

Neha Sharma07 अग. 2026, 05:18 PM IST
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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर राष्ट्रपति देंगी 2025 के राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार
भारत की राष्ट्रपति 7 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में वर्ष 2025 के लिए राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान करेंगी। यह समारोह देश के हथकरघा बुनकरों, शिल्पकारों और इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस हर वर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा को बढ़ावा देना, बुनकर समुदाय को प्रोत्साहित करना और देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना है। वर्ष 2015 में पहली बार राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया गया था।

उत्कृष्ट बुनकरों और शिल्पकारों को मिलेगा पुरस्कार
समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्वारा वर्ष 2025 के राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। ये पुरस्कार उन बुनकरों और शिल्पकारों को दिए जाते हैं, जिन्होंने हथकरघा क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट कला, नवाचार और पारंपरिक तकनीकों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्राप्त करने वाले कारीगर देश के विभिन्न हिस्सों की पारंपरिक बुनाई कला जैसे साड़ी, वस्त्र डिजाइन, प्राकृतिक रंगों के उपयोग और विशिष्ट हथकरघा तकनीकों को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।

हथकरघा क्षेत्र का आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व
भारत का हथकरघा क्षेत्र लाखों परिवारों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। ग्रामीण और छोटे शहरों में रहने वाले अनेक बुनकर परिवार इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। हथकरघा उत्पाद न केवल देश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारतीय कला और परंपरा को पहचान दिलाते हैं। सरकार द्वारा हथकरघा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें बुनकरों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाजार उपलब्ध कराना और आधुनिक तकनीकों से जोड़ना शामिल है।

युवाओं को जोड़ने और पारंपरिक कला बचाने की पहल
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का एक प्रमुख उद्देश्य युवा पीढ़ी को हथकरघा उद्योग से जोड़ना और पारंपरिक बुनाई कलाओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। सरकार और विभिन्न संस्थाएं बुनकरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई-कॉमर्स और नए बाजारों से जोड़ने पर भी जोर दे रही हैं।

भारत की विरासत को आगे बढ़ाने का अवसर
12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह के माध्यम से देश के उन मेहनती बुनकरों को सम्मान मिलेगा, जो अपनी कला और कौशल से भारतीय हथकरघा परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किए जाने वाले ये पुरस्कार बुनकर समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगे और हथकरघा क्षेत्र के विकास को नई दिशा देंगे।