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लखनऊ में वकीलों के अवैध चैंबरों पर बुलडोजर कार्रवाई, 58 निर्माण ढहाए गए l

लखनऊ में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश के बाद वकीलों के कथित अवैध चैंबरों और अतिक्रमण के खिलाफ नगर निगम ने कार्रवाई शुरू कर दी है। कचहरी रोड, कैसरबाग और रजिस्ट्री ऑफिस के आसपास सरकारी जमीन, सड़क, फुटपाथ और नालों पर बने चैंबरों को हटाने के लिए नगर निगम की टीम बुलडोजर और भारी पुलिस बल के साथ पहुंची। कार्रवाई से पहले बिजली विभाग ने संबंधित चैंबरों की बिजली आपूर्ति काट दी। रिपोर्टों के मुताबिक, अभियान के दौरान 58 अवैध चैंबर ढहाए गए, जबकि नगर निगम ने 200 से अधिक निर्माणों को चिन्हित किया था।

Kashish Rai31 अग. 2026, 04:58 PM IST
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लखनऊ में वकीलों के अवैध चैंबरों पर बुलडोजर कार्रवाई, 58 निर्माण ढहाए गए l
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वकीलों के कथित अवैध चैंबरों के खिलाफ एक बार फिर बुलडोजर कार्रवाई शुरू हो गई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के निर्देश के बाद लखनऊ नगर निगम ने कोर्ट परिसर और कचहरी रोड के आसपास अतिक्रमण कर बनाए गए चैंबरों और अन्य अस्थायी निर्माणों को हटाने का अभियान शुरू किया। रविवार को नगर निगम की टीम बुलडोजर और अन्य मशीनों के साथ मौके पर पहुंची। कार्रवाई के दौरान पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। वकीलों के चैंबरों से जुड़ा मामला होने के कारण मौके पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था।

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू करने से पहले बिजली विभाग की टीम ने संबंधित चैंबरों की बिजली आपूर्ति काट दी। इसके बाद नगर निगम के दस्ते ने चिन्हित निर्माणों को हटाना शुरू किया। कार्रवाई कचहरी रोड, कैसरबाग, जिला कोर्ट, रजिस्ट्री ऑफिस और आसपास के इलाकों में की गई। नगर निगम के अनुसार, कोर्ट परिसर के आसपास कई चैंबर सरकारी जमीन, सड़क, फुटपाथ और नालों की जगह पर बनाए गए थे। इन निर्माणों के कारण रास्तों पर अतिक्रमण हो रहा था और आम लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। नगर निगम ने ऐसे 200 से अधिक चैंबरों और अन्य निर्माणों को चिन्हित कर पहले ही संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया था।

नोटिस में चैंबर खाली करने और अतिक्रमण स्वयं हटाने के लिए 29 अगस्त तक की समयसीमा दी गई थी। प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि यदि तय समय तक कब्जे नहीं हटाए गए, तो नगर निगम अपनी ओर से कार्रवाई करेगा और निर्माणों को ध्वस्त कर दिया जाएगा। समयसीमा समाप्त होने के बाद 30 अगस्त को नगर निगम ने बुलडोजर अभियान शुरू कर दिया। इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, कोर्ट के आदेश में 72 चैंबरों और दुकानों से जुड़े अवैध कब्जों को हटाने की बात कही गई थी। नगर निगम ने इन निर्माणों को हटाने के लिए नोटिस जारी किए थे। बाद में कुछ वकील कार्रवाई रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद नगर निगम के लिए ध्वस्तीकरण कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया।

रिपोर्टों के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान 58 अवैध चैंबरों को ढहाया गया। कुछ वकीलों ने प्रशासन से कहा कि केवल उन्हीं चैंबरों पर कार्रवाई की जाए, जो कोर्ट के आदेश और नगर निगम की सूची में शामिल हैं। इस दौरान हल्का विरोध भी सामने आया, लेकिन बड़ी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी के कारण स्थिति नियंत्रण में रही। यह पहली बार नहीं है जब लखनऊ में वकीलों के चैंबरों और कोर्ट परिसर के आसपास बने कथित अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इससे पहले मई में भी नगर निगम ने हाई कोर्ट के निर्देश पर अभियान चलाया था। उस समय कार्रवाई के दौरान विरोध और हंगामे की स्थिति बनी थी। अब मौजूदा अभियान को उसी कार्रवाई के दूसरे चरण के तौर पर देखा जा रहा है।

नगर निगम और प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन, सड़कों, फुटपाथों और नालों पर किसी भी तरह का अतिक्रमण स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, कोर्ट के आदेश और निर्धारित प्रक्रिया के तहत चिन्हित निर्माणों को हटाया जा रहा है। अभियान के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि आम लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो और कानून-व्यवस्था बनी रहे। वकीलों की ओर से कार्रवाई को लेकर आपत्ति जताई गई है। उनका कहना है कि ध्वस्तीकरण से पहले निर्माणों की सूची, कोर्ट के आदेश और नगर निगम की कार्रवाई के दायरे का स्पष्ट पालन होना चाहिए। वहीं प्रशासन का पक्ष है कि संबंधित लोगों को पहले नोटिस दिया गया था और उन्हें खुद कब्जा हटाने का पर्याप्त समय भी दिया गया था। फिलहाल नगर निगम की कार्रवाई जारी है। प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर अभियान की निगरानी कर रहे हैं। पुलिस और बिजली विभाग की टीम भी कार्रवाई में सहयोग कर रही है। आने वाले दिनों में चिन्हित बाकी चैंबरों और अन्य अवैध निर्माणों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।