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साइलेंट वायरस’ बन रहा साइबर अपराध! इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- पैसा ही नहीं, भरोसा और सुरक्षा भी खतरे में

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साइबर अपराध के बढ़ते खतरे पर गंभीर चिंता जताते हुए इसे देश में फैल रहे “साइलेंट वायरस” जैसा बताया है। यह टिप्पणी ₹16 करोड़ से अधिक के नैनीताल बैंक साइबर फ्रॉड मामले में आरोपी की दूसरी जमानत याचिका खारिज करते हुए सामने आई। अदालत ने कहा कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी विकास ने जहां देश को तेजी से जोड़ा है, वहीं साइबर अपराधियों के लिए नई कमजोरियां भी पैदा हुई हैं। कोर्ट ने phishing, ransomware, cyber-stalking और data breach जैसे अपराधों का उल्लेख करते हुए कहा कि साइबर अपराध का नुकसान केवल पैसों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के विश्वास, सुरक्षा और प्रगति को भी प्रभावित करता है।

Samant Dubey23 अग. 2026, 05:49 PM IST
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साइलेंट वायरस’ बन रहा साइबर अपराध! इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- पैसा ही नहीं, भरोसा और सुरक्षा भी खतरे में

₹16 करोड़ के साइबर फ्रॉड मामले में सुनवाई

मामला नैनीताल बैंक के मुख्य सर्वर से कथित तौर पर बड़ी रकम की हेराफेरी से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार साइबर अपराधियों ने बैंक के सिस्टम को निशाना बनाकर ₹16 करोड़ से ज्यादा की रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर की थी। इसी मामले में आरोपी मोहम्मद शहवेज ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दूसरी बार जमानत की मांग की थी। अदालत ने सुनवाई के बाद उसकी याचिका खारिज कर दी।

कोर्ट ने साइबर अपराध को बताया ‘साइलेंट वायरस’

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने साइबर अपराध की व्यापकता पर टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि भारत में तकनीक और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ने के साथ साइबर अपराधों में भी वृद्धि हुई है। कोर्ट ने phishing scams, ransomware attacks, cyber-stalking और data breaches जैसे अपराधों का विशेष रूप से उल्लेख किया। अदालत के मुताबिक डिजिटल बदलाव ने जहां कनेक्टिविटी बढ़ाई है, वहीं साइबर अपराधियों द्वारा दुरुपयोग की जा सकने वाली कमजोरियां भी सामने आई हैं।

नुकसान सिर्फ बैंक खाते तक सीमित नहीं

हाईकोर्ट की टिप्पणी का सबसे अहम पहलू यह है कि साइबर अपराध को केवल आर्थिक अपराध के तौर पर नहीं देखा गया। अदालत के अनुसार ऐसे अपराध लोगों की मेहनत की कमाई छीनने के साथ-साथ समाज के भरोसे, सुरक्षा और प्रगति को भी नुकसान पहुंचाते हैं। डिजिटल सेवाओं पर लोगों की निर्भरता बढ़ने के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी का असर व्यक्तिगत नुकसान से आगे बढ़कर व्यापक सामाजिक चुनौती बन सकता है।

हर वर्ग को प्रभावित कर रहा साइबर अपराध

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि साइबर अपराध धर्म, क्षेत्र, शिक्षा या सामाजिक वर्ग की सीमा तक सीमित नहीं है। अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग इसके शिकार हो रहे हैं। अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि रोजाना बड़ी संख्या में लोग साइबर अपराधियों के हाथों अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं। इसी वजह से कोर्ट ने साइबर अपराध को गंभीर सामाजिक समस्या बताते हुए इसे नियंत्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

आरोपी पर क्या आरोप है?

रिपोर्ट के मुताबिक अभियोजन पक्ष ने आरोपी मोहम्मद शहवेज को एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि उसने कथित तौर पर कमीशन के बदले ऐसे बैंक खातों की व्यवस्था की, जिनका इस्तेमाल धोखाधड़ी की रकम को आगे भेजने में किया गया। उसके खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज होने की जानकारी दी गई है। हालांकि ये सभी आरोप हैं और मुकदमे में इनके प्रमाण का निर्धारण अदालत द्वारा किया जाना बाकी है।

दूसरी जमानत याचिका भी खारिज

आरोपी की ओर से जमानत के लिए सह-आरोपियों को मिली राहत का हवाला दिया गया था। लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि केवल समानता के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती।

अदालत को प्रत्येक आरोपी की व्यक्तिगत भूमिका, आरोपों की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्य और रिहाई के बाद मुकदमे पर संभावित प्रभाव जैसे पहलुओं को देखना होता है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने दूसरी जमानत याचिका खारिज कर दी।

डिजिटल इंडिया के साथ साइबर सुरक्षा भी जरूरी

हाईकोर्ट की टिप्पणी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश में डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऑनलाइन बैंकिंग, UPI, डिजिटल दस्तावेज और इंटरनेट आधारित सेवाओं ने सुविधा बढ़ाई है, लेकिन इनके साथ साइबर सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ी है। अदालत ने इसी व्यापक चुनौती की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि तकनीकी प्रगति के साथ उससे जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करना भी जरूरी है।

निष्कर्ष

इलाहाबाद हाईकोर्ट का संदेश साफ है—डिजिटल विकास जितना तेज होगा, साइबर सुरक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण होगी। ₹16 करोड़ के बैंक साइबर फ्रॉड मामले में जमानत खारिज करते हुए अदालत ने साइबर अपराध को केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि समाज के विश्वास और सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चुनौती के रूप में देखा।