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सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट से ट्रिब्यूनल तक केंद्र की पैरवी के लिए नए नियम, वकीलों के पैनल में नियुक्ति की पूरी गाइडलाइन जारी

केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और ट्रिब्यूनलों में पैरवी करने वाले वकीलों के लिए अब खेल के नियम बदल गए हैं। सिर्फ वर्षों का अनुभव दिखाकर Panel Counsel बनना पर्याप्त नहीं होगा। नई गाइडलाइन में वकील की विशेषज्ञता, जटिल मामलों को संभालने की क्षमता, पेशेवर रिकॉर्ड, ईमानदारी और प्रदर्शन को भी कसौटी बनाया गया है। 20 अगस्त 2026 को जारी इन नए नियमों के तहत पैनल में शामिल वकीलों के काम की हर साल समीक्षा होगी और गंभीर लापरवाही या पेशेवर कदाचार पर उन्हें बीच कार्यकाल में भी हटाया जा सकेगा।

Sonali23 अग. 2026, 06:27 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट से ट्रिब्यूनल तक केंद्र की पैरवी के लिए नए नियम, वकीलों के पैनल में नियुक्ति की पूरी गाइडलाइन जारी

नई दिल्ली।

 केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, जिला एवं अधीनस्थ अदालतों, ट्रिब्यूनलों और अन्य न्यायिक मंचों पर भारत संघ की ओर से पैरवी करने वाले वकीलों की नियुक्ति यानी Empanelment को लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी है। कानून एवं न्याय मंत्रालय के Department of Legal Affairs ने 20 अगस्त 2026 को Office Memorandum जारी कर Panel Counsel के चयन, योग्यता, अनुभव, कार्यकाल, प्रदर्शन की समीक्षा और De-empanelment से जुड़े नियमों को स्पष्ट किया है। आधिकारिक गाइडलाइन के मुताबिक ये नियम जारी होने की तारीख से प्रभावी हो गए हैं। सबसे अहम बात यह है कि केंद्र सरकार अब Panel Counsel के चयन में केवल वकालत के वर्षों को ही आधार नहीं बनाएगी। वकील ने किस तरह के मामले संभाले हैं, मामलों की प्रकृति और जटिलता क्या रही है, उसने कितनी जिम्मेदारी निभाई है और वह हाई-स्टेक मामलों को कितनी प्रभावी ढंग से संभाल सकता है—इन पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाएगा। इसके साथ ही पेशेवर आचरण, ईमानदारी और पिछला प्रदर्शन भी चयन प्रक्रिया का हिस्सा होगा।

20 अगस्त को जारी हुआ Office Memorandum

Department of Legal Affairs की Judicial Section ने 20 अगस्त 2026 को Office Memorandum संख्या J-11022/2/2015-Judicial/E.130475 जारी किया। इसमें कहा गया है कि Department of Legal Affairs को विभिन्न अदालतों, ट्रिब्यूनलों और फोरम में Union of India की ओर से मुकदमों की पैरवी की जिम्मेदारी है और इसके लिए वकीलों को सामान्यतः तीन वर्ष की अवधि के लिए Panel Counsel के रूप में नियुक्त किया जाता है। नई गाइडलाइन जारी होने के बाद पहले से नियुक्त Panel Counsel को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। पुराने पैनल पर नियुक्त वकील अपनी मौजूदा नियुक्ति की निर्धारित अवधि पूरी होने तक Panel Counsel बने रहेंगे।

Panel Counsel बनने के लिए क्या योग्यता जरूरी?

नई व्यवस्था के तहत आवेदन करने वाले वकील के पास Bar Council of India से मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या कॉलेज से कानून की Bachelor’s degree होना जरूरी है।

इसके अलावा—

• संबंधित State Bar Council में Advocates Act, 1961 के तहत नामांकन होना चाहिए।

• All India Bar Examination यानी AIBE पास किया होना चाहिए।

• Certificate of Practice यानी CoP प्राप्त होना चाहिए।

• निर्धारित श्रेणी के लिए आवश्यक कानूनी अनुभव पूरा होना चाहिए।

• आवेदक का पेशेवर रिकॉर्ड, आचरण और Integrity भी चयन में देखी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट में 3 श्रेणियां, 3 से 5 साल का अनुभव

सुप्रीम कोर्ट के लिए केंद्र ने Panel Counsel की तीन श्रेणियां निर्धारित की हैं।

Group A Panel Counsel के लिए कम से कम 5 वर्ष का कानूनी अनुभव जरूरी है।

Group B Panel Counsel के लिए कम से कम 4 वर्ष का अनुभव जरूरी है।

Group C Panel Counsel के लिए कम से कम 3 वर्ष का अनुभव आवश्यक है।

हालांकि केवल न्यूनतम अनुभव पूरा कर लेना नियुक्ति का अधिकार नहीं देता। चयन के दौरान मामलों की प्रकृति, जटिलता, जिम्मेदारी और हाई-स्टेक मुकदमों को संभालने की क्षमता भी देखी जाएगी।

हाईकोर्ट में किस पद के लिए कितना अनुभव?

अधिकांश हाईकोर्ट के लिए Deputy Solicitor General के पद पर नियुक्ति के लिए 10 वर्ष, Senior Panel Counsel के लिए 5 वर्ष और Central Government Counsel के लिए 4 वर्ष का न्यूनतम कानूनी अनुभव निर्धारित किया गया है। यह व्यवस्था इलाहाबाद, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, मद्रास, मणिपुर, मेघालय, ओडिशा, पटना, पंजाब एवं हरियाणा, राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, त्रिपुरा और उत्तराखंड समेत कई हाईकोर्ट के लिए लागू की गई है। हालांकि सभी हाईकोर्ट में एक जैसी श्रेणियां नहीं हैं। उदाहरण के तौर पर दिल्ली हाईकोर्ट के लिए Central Government Standing Counsel और Senior Panel Counsel के लिए 5-5 वर्ष, जबकि Government Pleader के लिए 2 वर्ष का न्यूनतम अनुभव रखा गया है। वहीं Bombay High Court की मुख्य पीठ, मुंबई के लिए Special Counsel के लिए 5 वर्ष, Senior Counsel Group-I के लिए 4 वर्ष, Senior Counsel Group-II के लिए 3 वर्ष और Junior Counsel के लिए 2 वर्ष का अनुभव निर्धारित है।

CAT और AFT के लिए भी अलग अनुभव सीमा

नई गाइडलाइन में विभिन्न ट्रिब्यूनलों के लिए भी अनुभव की सीमा निर्धारित की गई है। देशभर के CAT Benches के लिए, मुंबई और कोलकाता को छोड़कर, Senior Central Government Standing Counsel और Senior Panel Counsel के लिए 5 वर्ष तथा Additional Central Government Standing Counsel के लिए 3 वर्ष का अनुभव निर्धारित है। CAT की मुंबई और कोलकाता पीठों के लिए Special Counsel के लिए 5 वर्ष, Senior Counsel Group-I के लिए 4 वर्ष, Senior Counsel Group-II के लिए 3 वर्ष और Junior Counsel के लिए 2 वर्ष का अनुभव निर्धारित किया गया है। Armed Forces Tribunal यानी AFT की सभी पीठों के लिए Senior Central Government Standing Counsel और Senior Panel Counsel के लिए 5 वर्ष तथा Central Government Counsel के लिए 4 वर्ष का अनुभव निर्धारित है।

जिला अदालतों और Arbitration मामलों के लिए भी नियम

दिल्ली की District Courts में Senior Panel Counsel के लिए 5 वर्ष और Additional Central Government Counsel के लिए 3 वर्ष का अनुभव आवश्यक है।

दिल्ली को छोड़कर देशभर की District एवं Subordinate Courts में Standing Government Counsel के लिए 5 वर्ष और Additional Standing Government Counsel के लिए 3 वर्ष का अनुभव निर्धारित किया गया है। Delhi-NCR में Arbitration Matters के लिए Senior Counsel को 5 वर्ष और Junior Counsel को 2 वर्ष का अनुभव होना चाहिए।

NGT और TRAI के लिए 15 साल का अनुभव

नई गाइडलाइन में National Green Tribunal यानी NGT के Standing Counsel और Telecom Regulatory Authority of India यानी TRAI के Standing Counsel के लिए न्यूनतम 15 वर्ष का कानूनी अनुभव निर्धारित किया गया है। वहीं High Court और Special Court में Special Public Prosecutor या Additional Public Prosecutor के लिए न्यूनतम 10 वर्ष का अनुभव निर्धारित किया गया है।

Income Tax, GST, PMLA जैसे मामलों के विशेषज्ञों को मौका

केंद्र सरकार ने Special Laws में विशेषज्ञता रखने वाले वकीलों के लिए भी रास्ता खुला रखा है। Income Tax, Customs, GST और PMLA जैसे विशेष कानूनों में अनुभव रखने वाले अधिवक्ताओं को संबंधित मामलों के लिए Specialized Panels में शामिल करने पर विचार किया जा सकता है। इसके अलावा सरकारी सेवा के दौरान कम से कम 10 वर्ष का कानूनी कार्य अनुभव रखने वाले व्यक्तियों को भी उनके विशेषज्ञता क्षेत्र के आधार पर Panel Counsel के रूप में नियुक्ति के लिए विचार किया जा सकता है।

आवेदन कैसे होगा?

Panel Counsel बनने के इच्छुक वकीलों को निर्धारित Application Form में आवेदन करना होगा। आवेदन Department of Legal Affairs के Deputy Secretary को संबोधित किया जाएगा और गाइडलाइन में दिए गए ईमेल माध्यम से भेजा जा सकता है। आवेदन के साथ वकील को अपनी शैक्षणिक योग्यता, State Bar Council का Enrolment Number, पेशेवर अनुभव और संबंधित दस्तावेज देने होंगे। यदि किसी अन्य सरकारी विभाग, PSU, Statutory Body या संगठन में पहले से Empanelment रहा है तो उसका विवरण भी देना होगा। आवेदक को यह घोषणा भी करनी होगी कि उसे किसी आपराधिक अपराध, जिसमें Moral Turpitude से जुड़ा अपराध शामिल है, में दोषी नहीं ठहराया गया है और वह किसी अदालत, Bar Council या सक्षम प्राधिकरण द्वारा वकालत करने से Disqualify या Debar नहीं किया गया है।

गलत या अधूरा आवेदन हुआ तो सीधे खारिज

Department of Legal Affairs आवेदन की पात्रता, दस्तावेजों की प्रामाणिकता, आवेदन की पूर्णता और उम्मीदवार की उपयुक्तता की जांच करेगा। निर्धारित प्रारूप में नहीं होने वाला, अस्पष्ट, अधूरा या पात्रता पूरी नहीं करने वाला आवेदन सीधे खारिज किया जा सकता है।

तीन साल का कार्यकाल, लेकिन हर साल Performance Review

Panel Counsel का सामान्य कार्यकाल तीन वर्ष या अगले आदेश तक, जो पहले हो, निर्धारित किया गया है। हालांकि नियुक्ति तीन साल की होने के बावजूद वकील के प्रदर्शन की सालाना समीक्षा की जाएगी। इसका मतलब यह है कि पैनल में शामिल होने के बाद भी वकील का प्रदर्शन लगातार Department की निगरानी में रहेगा।

किन आधारों पर वकील को पैनल से हटाया जा सकता है?

केंद्र सरकार किसी Panel Counsel को तीन वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले भी De-empanel कर सकती है।

इसके प्रमुख आधार हैं—

• सरकारी निर्देशों के विपरीत कार्य करना

• Brief वापस नहीं करना

• Court Fee या Costs आदि की राशि का दुरुपयोग करना

• Contempt of Court

• Professional Misconduct

• किसी अदालत द्वारा दोषसिद्ध किया जाना

इन परिस्थितियों में केंद्र सरकार वकील को Panel से हटाने की कार्रवाई कर सकती है।

वकील को इस्तीफा देना हो तो एक महीने का नोटिस

यदि कोई Panel Counsel स्वयं पैनल से हटना चाहता है तो उसे सामान्यतः केंद्र सरकार को कम से कम एक महीने पहले लिखित नोटिस देना होगा। नियुक्ति समाप्त होने, इस्तीफा देने या पैनल में नवीनीकरण नहीं होने की स्थिति में वकील को संबंधित मंत्रालय या विभाग की सभी मूल केस फाइलें, रिकॉर्ड, दस्तावेज और Brief वापस करने होंगे। लंबित मामलों का व्यवस्थित हस्तांतरण भी निर्धारित अवधि में करना होगा।

किसी दूसरे वकील को केस सौंपने पर भी रोक

नई गाइडलाइन के तहत Panel Counsel अपनी जिम्मेदारी वाला कोई केस, Brief या मामला किसी दूसरे वकील को बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व लिखित अनुमति के Assign, Transfer या Delegate नहीं कर सकेगा। साथ ही मंत्रालय या विभाग से संबंधित रिकॉर्ड, दस्तावेज और सूचनाओं की गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य होगा।

पैनल में नाम आ गया तो केस मिलने की गारंटी नहीं

नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि Panel Counsel के रूप में Empanelment से किसी वकील को निश्चित संख्या में केस या Brief मिलने का अधिकार नहीं होगा। किस वकील को कौन-सा मामला सौंपा जाएगा, यह Department of Legal Affairs के विवेक पर निर्भर करेगा। यानी पैनल में शामिल होना अपने आप में किसी न्यूनतम संख्या में केस मिलने की गारंटी नहीं है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

केंद्र सरकार की ओर से अदालतों में पैरवी करने वाले वकील सीधे Union of India के मुकदमों को संभालते हैं। ऐसे में Panel Counsel के चयन में केवल अनुभव के बजाय विशेषज्ञता, मामलों की जटिलता, पेशेवर आचरण, Integrity और Performance को शामिल करना महत्वपूर्ण बदलाव है। नई व्यवस्था यह भी स्पष्ट करती है कि Empanelment कोई स्थायी नियुक्ति नहीं है और न ही इससे केस मिलने का अधिकार पैदा होता है। हर साल Performance Review और गंभीर पेशेवर चूक पर De-empanelment का प्रावधान सरकार को Panel Counsel की जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक स्पष्ट प्रशासनिक ढांचा देता है।