government
4200 करोड़ का एक्सप्रेसवे सवालों के घेरे में, अधिकारियों पर गिरी गाज
लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद NHAI ने बड़ा कदम उठाया है। मरम्मत पूरी होने तक टोल वसूली रोक दी गई है। निर्माण कंपनी और परियोजना से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है, जबकि तकनीकी जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम भी गठित की गई है।
Neha Sharma06 अग. 2026, 03:02 PM IST

लखनऊ: देश के सबसे आधुनिक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे में शामिल लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। लगभग ₹4,200 करोड़ की लागत से बने इस 63 किलोमीटर लंबे छह-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। इस एक्सप्रेसवे का उद्देश्य लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा समय को लगभग 90 मिनट से घटाकर 35–40 मिनट करना था।
हालांकि उद्घाटन के 13 से 23 दिनों के भीतर उन्नाव जिले के कोरारी क्षेत्र सहित कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत उखड़ने और सतह खराब होने की घटनाएं सामने आईं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठे। शुरुआत में NHAI ने स्पष्ट किया कि सड़क पूरी तरह नहीं धंसी थी, बल्कि केवल ऊपरी "वियरिंग कोट" (Wearing Coat) की परत प्रभावित हुई थी। इसके बावजूद लगातार सामने आ रही शिकायतों ने प्राधिकरण को विस्तृत जांच शुरू करने पर मजबूर कर दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने कई बड़े फैसले लिए। सबसे पहले एक्सप्रेसवे पर मरम्मत पूरी होने तक टोल वसूली रोक दी गई, ताकि यात्रियों से खराब सड़क के लिए शुल्क न लिया जाए। NHAI ने कहा कि जब तक सड़क पूरी तरह सुरक्षित और मानकों के अनुरूप नहीं हो जाती, तब तक वाहन चालक बिना टोल दिए यात्रा कर सकेंगे।
जांच के दौरान निर्माण कार्य में गुणवत्ता संबंधी गंभीर खामियां मिलने के बाद निर्माण कंपनी PNC Infratech के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू की गई। NHAI ने कंपनी को "नॉन-परफॉर्मर" घोषित करने और भविष्य की परियोजनाओं की निविदाओं (टेंडर) से बाहर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। इसके अलावा मरम्मत, जांच और राजस्व नुकसान का खर्च भी संबंधित निर्माण एजेंसी से वसूलने की तैयारी की जा रही है।
केवल कंपनी ही नहीं, बल्कि परियोजना से जुड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई। परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को पद से हटाकर मुख्यालय भेज दिया गया और उनकी जगह नए परियोजना निदेशक की नियुक्ति की गई। वहीं पूर्व परियोजना निदेशक के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई शुरू करते हुए चार्जशीट जारी की गई। इसके साथ ही निर्माण कार्य की निगरानी करने वाले तीन इंजीनियरों पर दो वर्ष तक किसी भी NHAI परियोजना में भाग लेने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए NHAI ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के विशेषज्ञों की टीम को तकनीकी जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। विशेषज्ञ यह पता लगाएंगे कि सड़क की सतह खराब होने का वास्तविक कारण क्या था—निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, डिजाइन, जल निकासी व्यवस्था या किसी अन्य तकनीकी कमी के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोष तय किए जाएंगे और आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं में से एक है। इस सड़क से दोनों शहरों के बीच तेज़ और सुरक्षित आवागमन, औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा तथा व्यापारिक परिवहन को गति मिलने की उम्मीद थी। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क की गुणवत्ता पर उठे सवालों ने निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है।
फिलहाल एक्सप्रेसवे पर मरम्मत कार्य जारी है और NHAI का कहना है कि सभी तकनीकी कमियों को दूर करने के बाद ही टोल वसूली दोबारा शुरू की जाएगी।
