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इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा झटका: राजस्व परिषद के 3 सदस्यीय बेंच वाले आदेश पर रोक, सरकार से मांगा जवाब
उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद में अब हर मामले की शुरुआती सुनवाई तीन सदस्यीय पीठ के सामने नहीं होगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजस्व परिषद के अध्यक्ष द्वारा जारी उस प्रशासनिक आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें सभी मामलों को तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए भेजने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला केवल कार्यप्रणाली से जुड़ा नहीं है, बल्कि राजस्व परिषद के अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र और उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता नियमावली के प्रावधानों की व्याख्या से भी संबंधित है।

प्रयागराज:
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद में सभी मामलों की प्रारंभिक सुनवाई तीन सदस्यीय पीठ से कराने वाले आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह आदेश बोर्ड ऑफ रेवेन्यू बार एसोसिएशन की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया गया।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने की। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि याचिका में उठाए गए प्रश्न महत्वपूर्ण हैं और इन पर विस्तृत विचार की आवश्यकता है।
क्या था राजस्व परिषद का आदेश?
उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद के अध्यक्ष की ओर से जारी प्रशासनिक निर्देश में कहा गया था कि परिषद के सभी मामलों की शुरुआती सुनवाई तीन सदस्यीय पीठ के सामने कराई जाए। इस आदेश को बोर्ड ऑफ रेवेन्यू बार एसोसिएशन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता नियमावली के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।
बार एसोसिएशन की मुख्य दलील
याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि नियम 10 और 12 के तहत अध्यक्ष को प्रत्येक मामले को अनिवार्य रूप से तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष भेजने का अधिकार नहीं दिया गया है।
बार एसोसिएशन के अनुसार, पहले केवल महत्वपूर्ण, जटिल या विशेष कानूनी प्रश्नों वाले मामलों को ही बड़ी पीठ के सामने भेजा जाता था।
याचिका में यह भी कहा गया कि सभी मामलों को तीन सदस्यीय पीठ के सामने भेजने से राजस्व परिषद में पहले से लंबित हजारों मामलों के निस्तारण की गति प्रभावित हो सकती है।
हाईकोर्ट के सामने मुख्य कानूनी सवाल
इस मामले में हाईकोर्ट को अब यह तय करना होगा कि:
क्या राजस्व परिषद के अध्यक्ष प्रशासनिक आदेश के माध्यम से सभी मामलों को अनिवार्य रूप से तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष भेज सकते हैं?
या फिर बड़ी पीठ का गठन केवल उन्हीं मामलों में किया जा सकता है जिनमें विशेष महत्व या जटिल कानूनी प्रश्न मौजूद हों?
हाईकोर्ट ने माना कि यह केवल प्रशासनिक सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि राजस्व न्याय प्रणाली की संरचना और अधिकार क्षेत्र से जुड़ा मामला है।
लंबित मामलों पर क्या पड़ेगा असर?
बार एसोसिएशन ने अदालत को बताया कि यदि प्रत्येक मामले की शुरुआत तीन सदस्यीय पीठ से होगी तो सुनवाई की प्रक्रिया लंबी हो सकती है।
इसका असर:
• राजस्व विवादों के निस्तारण में देरी हो सकती है
• पीठों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है
• छोटे और सामान्य मामलों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है
राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश में भूमि विवाद, राजस्व रिकॉर्ड, दाखिल-खारिज और अन्य राजस्व कानूनों से जुड़े मामलों की सर्वोच्च अपीलीय संस्था है। हाईकोर्ट पहले भी राजस्व मामलों में प्रक्रिया और न्यायिक कार्यप्रणाली को लेकर हस्तक्षेप करता रहा है।
हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित आदेश के क्रियान्वयन पर अंतिम निर्णय तक अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है। उस दिन राज्य सरकार के जवाब के बाद हाईकोर्ट अंतरिम आदेश पर आगे विचार करेगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बोर्ड ऑफ रेवेन्यू बार एसोसिएशन की याचिका पर राजस्व परिषद में सभी मामलों की तीन सदस्यीय पीठ से प्रारंभिक सुनवाई कराने वाले प्रशासनिक आदेश के अमल पर रोक लगाई है।
