लॉ-एंड-आर्डर
छत्तीसगढ़ के चर्चित मैनपावर कमीशन घोटाले में अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत, लेकिन राज्य से बाहर रहने की शर्त
करीब छह महीने से जेल में बंद और करोड़ों रुपये के कथित मैनपावर कमीशन घोटाले के आरोपी अनवर ढेबर को आखिरकार सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई। लेकिन राहत के साथ अदालत ने सख्त शर्त भी लगा दी—जब तक मामला विचाराधीन है, तब तक उन्हें छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा और केवल ट्रायल के लिए ही राज्य में आने की अनुमति होगी।

नई दिल्ली:
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित मैनपावर कमीशन घोटाले में आरोपी कारोबारी अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहाना की तीन सदस्यीय पीठ ने 5 अगस्त 2026 को सुनवाई के दौरान उन्हें अंतरिम जमानत देने का आदेश दिया। हालांकि अदालत ने यह राहत कड़ी शर्तों के साथ दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतरिम जमानत के दौरान अनवर ढेबर छत्तीसगढ़ राज्य के बाहर रहेंगे और केवल ट्रायल या अदालत की कार्यवाही में शामिल होने के लिए ही राज्य में प्रवेश कर सकेंगे।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में कथित मैनपावर कमीशन घोटाले से जुड़ा है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के अनुसार, निगम के लिए मैनपावर उपलब्ध कराने वाली निजी एजेंसियों से उनके बिल पास कराने और भुगतान जारी करने के बदले कथित रूप से अवैध कमीशन लिया जाता था।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क का मुख्य लाभार्थी (Principal Beneficiary) अनवर ढेबर था। आरोप है कि CSMCL के कुछ अधिकारियों और निजी बिचौलियों की मदद से एजेंसियों से कमीशन वसूला जाता था।
कैसे सामने आया कथित घोटाला?
जांच के अनुसार, 29 नवंबर 2023 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक कार्रवाई के दौरान 28.80 लाख रुपये नकद जब्त किए थे। एजेंसियों का दावा है कि यह रकम Eagle Hunter Solutions Limited के लगभग 3.43 करोड़ रुपये के बिल पास कराने के एवज में मांगी गई लगभग 8 प्रतिशत कथित रिश्वत का हिस्सा थी। इसी कथित लेन-देन के बाद मामले की जांच तेज हुई और बाद में EOW तथा ACB ने अलग से केस दर्ज किया।
अनवर ढेबर की गिरफ्तारी कब हुई?
EOW/ACB ने 23 फरवरी 2026 को अनवर ढेबर को गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ IPC की धारा 120-B (आपराधिक साजिश) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं 7(b) और 8 के तहत मामला दर्ज किया गया। बाद में चार्जशीट दाखिल होने के बाद IPC की धाराएं 420, 467, 468 और 471 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 12 भी जोड़ी गईं।
13 मई 2026 को हाईकोर्ट ने क्यों ठुकराई थी जमानत?
13 मई 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनवर ढेबर की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री प्रथम दृष्टया एक सुनियोजित भ्रष्टाचार नेटवर्क की ओर संकेत करती है। अदालत ने माना कि आर्थिक अपराध सार्वजनिक धन और शासन व्यवस्था को प्रभावित करते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में जमानत देते समय विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने यह भी माना कि जांच अभी जारी है और आरोपी के गवाहों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं?
अनवर ढेबर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को अलग-अलग मामलों में लगातार गिरफ्तार कर हिरासत को "Evergreening of Custody" के जरिए बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अभियोजन के पास प्रत्यक्ष मनी ट्रेल का कोई ठोस साक्ष्य नहीं है।
वहीं, छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी और राज्य के एडवोकेट जनरल विवेक शर्मा ने कहा कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है तथा सरकार कुछ गोपनीय (Confidential) जानकारी अदालत के समक्ष रखना चाहती है। राज्य ने यह भी आशंका जताई कि आरोपी बाहर आने पर साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावित कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि राज्य सरकार किसी गोपनीय सामग्री पर भरोसा करना चाहती है तो आरोपी को भी उसके संबंध में उचित अवसर दिया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि एक ओर जांच की निष्पक्षता महत्वपूर्ण है, वहीं दूसरी ओर व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Right to Liberty) की भी रक्षा की जानी चाहिए। इन्हीं दोनों पहलुओं के बीच संतुलन बनाते हुए कोर्ट ने अंतरिम जमानत मंजूर की।
अंतरिम जमानत की प्रमुख शर्तें
• ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के अनुसार बेल बॉन्ड भरना होगा।
• अंतरिम जमानत के दौरान अनवर ढेबर छत्तीसगढ़ राज्य के बाहर रहेंगे।
• उन्हें अपना मोबाइल नंबर और रहने का पता सक्षम प्राधिकारी को देना होगा।
• केवल ट्रायल या अदालत की कार्यवाही में शामिल होने के लिए ही छत्तीसगढ़ आने की अनुमति होगी।
• मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 को होगी।
क्यों अहम है यह फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने अभी मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने केवल अंतरिम राहत देते हुए यह सुनिश्चित किया है कि आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राज्य की चल रही जांच, दोनों के हित सुरक्षित रहें। अदालत ने राज्य सरकार को गोपनीय सामग्री पेश करने का अवसर भी दिया है और साफ किया है कि अंतिम फैसला आगे की सुनवाई में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लिया जाएगा।
