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महिला पुलिसकर्मियों के सम्मान पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त: सभी थानों में महिला शौचालय और सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन लगाने का आदेश

राजधानी दिल्ली के पुलिस थानों में महिला पुलिसकर्मियों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी पर दिल्ली हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने निर्देश दिया है कि छह सप्ताह के भीतर सभी पुलिस थानों का सर्वे कर यह सुनिश्चित किया जाए कि हर थाने में महिला कर्मियों के लिए अलग शौचालय और कार्यशील सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन उपलब्ध हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा, स्वास्थ्य और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना प्रशासन की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

Sonali06 अग. 2026, 01:33 PM IST
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महिला पुलिसकर्मियों के सम्मान पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त: सभी थानों में महिला शौचालय और सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन लगाने का आदेश

नई दिल्ली, 5 अगस्त 2026:

महिला पुलिसकर्मियों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वास्थ्यकर कार्यस्थल सुनिश्चित करने की दिशा में दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को बड़ा और अहम आदेश जारी किया। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि राष्ट्रीय राजधानी के सभी पुलिस थानों में महिला पुलिसकर्मियों के लिए अलग शौचालय और कार्यशील सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन की उपलब्धता का छह सप्ताह के भीतर सर्वे कराया जाए। जहां ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहां इन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्थापित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। अदालत ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को सर्वे के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट और अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को होगी।

किस याचिका पर आया आदेश?

यह आदेश 'जस्टिस फॉर राइट्स फाउंडेशन' और उसकी महिला प्रकोष्ठ प्रतिनिधि मुस्कान सिंह बांकुरा द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया। अदालत ने इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय, दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।

याचिका में क्या कहा गया?

याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली पुलिस के विभिन्न थानों और इकाइयों में तैनात हजारों महिला पुलिसकर्मियों को आज भी मासिक धर्म स्वच्छता (Menstrual Hygiene) और अलग महिला शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इससे उन्हें ड्यूटी के दौरान गंभीर असुविधा, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और असम्मानजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

याचिका में जुलाई और अगस्त 2025 में सूचना का अधिकार (RTI) के तहत दिल्ली पुलिस के सभी 18 जिलों और विभिन्न इकाइयों से प्राप्त आंकड़ों का हवाला दिया गया है। इन आंकड़ों के अनुसार अधिकांश पुलिस थानों में कार्यशील सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन नहीं हैं, सैनिटरी वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण के लिए इंसिनरेटर (Incinerator) उपलब्ध नहीं हैं और मासिक धर्म स्वच्छता के लिए कोई अलग बजट भी निर्धारित नहीं किया गया है। कई पुलिस थानों में महिला पुलिसकर्मियों के लिए अलग और स्वच्छ शौचालय भी उपलब्ध नहीं हैं।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि महिला पुलिसकर्मियों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि किसी पुलिस थाने में महिला शौचालय या सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन उपलब्ध नहीं है, तो उसकी पहचान कर जल्द से जल्द यह सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

अदालत ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि छह सप्ताह के भीतर राजधानी के सभी पुलिस थानों का सर्वे पूरा किया जाए और यह बताया जाए कि किन-किन थानों में ये सुविधाएं उपलब्ध हैं तथा जहां नहीं हैं, वहां इन्हें उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि आदेश के अनुपालन में उठाए गए सभी कदमों का विस्तृत हलफनामा अगली सुनवाई से पहले दाखिल किया जाए।

संविधान के अधिकारों का हवाला

याचिका में कहा गया है कि महिला पुलिसकर्मियों को स्वच्छ शौचालय और मासिक धर्म स्वच्छता संबंधी सुविधाओं के बिना ड्यूटी करने के लिए मजबूर करना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 15 (भेदभाव का निषेध) और अनुच्छेद 21 (जीवन, गरिमा और निजता का अधिकार) का उल्लंघन है। साथ ही यह संविधान के नीति-निर्देशक सिद्धांतों (Directive Principles of State Policy) की भावना के भी विपरीत है।

याचिकाकर्ता ने क्या-क्या मांग की?

याचिका में अदालत से मांग की गई है कि—

  • सभी पुलिस थानों में कार्यशील सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन स्थापित की जाए।

  • सैनिटरी वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण के लिए इंसिनरेटर लगाए जाएं।

  • महिला पुलिसकर्मियों और महिला आगंतुकों के लिए अलग एवं स्वच्छ शौचालय बनाए जाएं।

  • मासिक धर्म स्वच्छता के लिए अलग बजट आवंटित किया जाए।

  • पूरे दिल्ली पुलिस के लिए इस संबंध में एक बाध्यकारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार किया जाए।

अन्य राज्यों का भी दिया गया उदाहरण

याचिका में यह भी कहा गया कि मुंबई पुलिस की 'स्मार्ट मैत्रिण' पहल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और लद्दाख पुलिस जैसी एजेंसियों में महिला पुलिसकर्मियों के लिए ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। इसलिए दिल्ली पुलिस में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

क्यों अहम है यह फैसला?

विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस बल में महिला कर्मियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में उन्हें सुरक्षित, स्वच्छ और गरिमापूर्ण कार्यस्थल उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। दिल्ली हाईकोर्ट का यह आदेश केवल बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य, गरिमा, समान अवसर और बेहतर कार्य परिस्थितियों को सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

केस विवरण

केस शीर्षक: Justice for Rights Foundation & Anr. v. GNCTD & Ors.

साइटेशन: 2026 (Del) 724

पीठ:
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय
न्यायमूर्ति तेजस करिया

अगली सुनवाई:
23 सितंबर 2026