लॉ-एंड-आर्डर
सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेगी जजों की संख्या, अब होंगे 38 न्यायाधीश
संसद ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही देश की सर्वोच्च अदालत में जजों की कुल संख्या अब 34 से बढ़ाकर 38 हो जाएगी। वहीं, दूसरी ओर केंद्र सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म, डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए बढ़ रही ड्रग्स तस्करी पर भी चिंता जताते हुए इससे निपटने के लिए तकनीकी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की जानकारी दी है।

संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा से सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक पारित हो गया है। इस विधेयक के कानून बनने के बाद सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी। इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद भी शामिल है। सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है जब सर्वोच्च न्यायालय में मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है और बड़ी संख्या में मुकदमे लंबित हैं। कानून मंत्रालय के अनुसार, देश में जनसंख्या वृद्धि, नागरिकों में कानूनी जागरूकता बढ़ने और न्याय पाने के लिए अदालतों में पहुंचने वाले लोगों की संख्या बढ़ने के कारण न्यायिक व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति से मामलों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद है।
16 मई के अध्यादेश की जगह लेगा नया कानून
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने इससे पहले 16 मई को एक अध्यादेश जारी किया था। अब संसद से विधेयक पारित होने के बाद यह अध्यादेश कानून का रूप ले लेगा। सरकार का कहना है कि अध्यादेश लाने का उद्देश्य न्यायिक व्यवस्था की तत्काल जरूरतों को पूरा करना था। संसद की मंजूरी मिलने के बाद अब इसे स्थायी कानूनी आधार मिल जाएगा।
पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनने की राह साफ
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संसद में न्यायपालिका से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देश को पहली महिला मुख्य न्यायाधीश मिलने की संभावना है। भारतीय न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में महिला न्यायाधीशों की संख्या में भी धीरे-धीरे वृद्धि हुई है। सरकार का कहना है कि न्यायपालिका में विविधता बढ़ना एक सकारात्मक बदलाव है।
दक्षिण भारत में सुप्रीम कोर्ट बेंच पर चर्चा जारी
कानून मंत्री ने दक्षिण भारत में सुप्रीम कोर्ट की बेंच स्थापित करने की मांग पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस विषय पर चर्चा जारी है। दक्षिण भारत के कई राज्यों से लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि सुप्रीम कोर्ट की एक क्षेत्रीय पीठ स्थापित की जाए, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों के लोगों को दिल्ली आने की परेशानी कम हो सके और न्याय तक पहुंच आसान हो। हालांकि, इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय न्यायपालिका और सरकार के बीच विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा।
अनुच्छेद 370 मुद्दे पर विपक्ष का राज्यसभा से वॉकआउट
सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या बढ़ाने वाले विधेयक पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में राजनीतिक गतिरोध भी देखने को मिला। कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर से जुड़े विषयों पर बोलने की अनुमति मांगी थी। अनुमति नहीं मिलने के विरोध में विपक्षी दलों ने राज्यसभा से वॉकआउट किया। विपक्ष का कहना था कि जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील संवैधानिक मुद्दों पर चर्चा का अवसर दिया जाना चाहिए। वहीं, सरकार की ओर से सदन की कार्यवाही तय नियमों के अनुसार चलाने की बात कही गई।
ड्रग्स तस्करी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल
संसद में गृह मंत्रालय ने देश में बढ़ती डिजिटल ड्रग्स तस्करी को लेकर अहम जानकारी साझा की। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोह अब आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहे हैं। ये गिरोह सोशल मैसेजिंग ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए खरीदारों और सप्लायरों से संपर्क स्थापित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि व्हाट्सएप, टेलीग्राम, स्नैपचैट और सिग्नल जैसे प्लेटफॉर्म्स के इस्तेमाल के मामले जांच एजेंसियों के सामने आए हैं।
डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी बनी बड़ी चुनौती
सरकार ने बताया कि ड्रग्स तस्करी के मामलों में डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल भी सामने आया है। डार्कनेट इंटरनेट का वह हिस्सा है जो सामान्य सर्च इंजन पर दिखाई नहीं देता और जहां कई बार अवैध गतिविधियां संचालित की जाती हैं। तस्कर अपनी पहचान छिपाने और डिजिटल भुगतान को गुप्त रखने के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे मामलों की जांच के लिए साइबर विशेषज्ञों, डिजिटल फॉरेंसिक टीमों और तकनीकी एजेंसियों की सहायता ली जा रही है।
NCB और जांच एजेंसियों को मिल रही विशेष ट्रेनिंग
गृह मंत्रालय ने बताया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों को डिजिटल माध्यमों से होने वाली ड्रग्स तस्करी से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए अमेरिकी ड्रग एन्फोर्समेंट एजेंसी (US-DEA) और गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU) के साथ मिलकर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में साइबर जांच, डिजिटल ट्रैकिंग, क्रिप्टो लेन-देन की निगरानी और ऑनलाइन ड्रग नेटवर्क को पहचानने जैसी तकनीकों पर फोकस किया जा रहा है।
सरकार का फोकस: तकनीक के जरिए अपराध पर नियंत्रण
केंद्र सरकार का कहना है कि अपराधी जिस तेजी से तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसी गति से सुरक्षा एजेंसियों को भी आधुनिक बनाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का फैसला न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम माना जा रहा है, वहीं डिजिटल माध्यमों से फैल रहे नशे के कारोबार पर रोक लगाने के लिए साइबर क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार, न्याय व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा दोनों क्षेत्रों में तकनीक, संसाधन और मानव क्षमता बढ़ाना आने वाले समय की प्रमुख प्राथमिकता है।
