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पीपलेश्वर महादेव मंदिर: डोंबिवली का जागृत शिवधाम, जहाँ श्रद्धा, इतिहास और आध्यात्मिक परंपरा का अद्भुत संगम

डोंबिवली (पूर्व) के नांदिवली पाड़ा (सागाव) स्थित श्री पीपलेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र का एक प्रसिद्ध जागृत देवस्थान माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहाँ विराजमान भगवान शिव सच्चे मन से की गई प्रार्थना और मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। महाशिवरात्रि और श्रावण मास में यहाँ हजारों भक्त दर्शन के लिए पहुँचते हैं। मंदिर के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष 2012 में इसे तीर्थक्षेत्र का 'क' दर्जा प्रदान किया।

Priyanka Gaikwad05 अग. 2026, 06:37 PM IST
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पीपलेश्वर महादेव मंदिर: डोंबिवली का जागृत शिवधाम, जहाँ श्रद्धा, इतिहास और आध्यात्मिक परंपरा का अद्भुत संगम
डोंबिवली (Dombivli): कल्याण–शिल मार्ग के समीप सागाव क्षेत्र में लगभग सात एकड़ हरित परिसर में स्थित श्री पीपलेश्वर महादेव मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम है। यह मंदिर डोंबिवली और आसपास के क्षेत्रों के प्रमुख शिवधामों में से एक माना जाता है। मान्यता के अनुसार लगभग 125 वर्ष पूर्व महान संत स्वामी शिवानंद ने यहाँ शिवलिंग की स्थापना की थी। उन्होंने कुछ समय तक इसी स्थान पर कठोर तपस्या की। बाद में उन्होंने यहाँ से लगभग पाँच किलोमीटर दूर स्थित खिडकाळेश्वर महादेव मंदिर में समाधि ली। प्रारंभिक समय में पीपल के वृक्ष के नीचे एक छोटे से टीन और कौलारू मंदिर में शिवलिंग स्थापित था।

लगभग 25 वर्ष पूर्व मंदिर ट्रस्ट ने इस स्थान के विकास का निर्णय लिया। इसके बाद भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। 31 जनवरी 2001 को रथ सप्तमी के पावन अवसर पर तुंगारेश्वर पर्वत के बालयोगी श्री सदानंद महाराज के करकमलों द्वारा शिवलिंग की पुनः प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई। मंदिर की बढ़ती ख्याति और श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष 2012 में इस मंदिर को आधिकारिक रूप से तीर्थक्षेत्र का 'क' दर्जा प्रदान किया। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही दाईं ओर भगवान हनुमान का सुंदर मंदिर दिखाई देता है।श्रद्धालुओं के विश्राम के लिए अनेक बैठने की व्यवस्था की गई है। परिसर में शिव-पार्वती कुटी, दो यज्ञशालाएँ तथा एक गोशाला भी स्थित है।

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यज्ञशालाओं में नियमित रूप से पूजा-अर्चना, हवन, धार्मिक अनुष्ठान एवं संस्कार आयोजित किए जाते हैं। श्रद्धालुओं को हवन सामग्री भी नाममात्र शुल्क पर उपलब्ध कराई जाती है। मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन कुआँ भी विशेष महत्व रखता है। एक समय सागाव क्षेत्र के लोगों को इसी कुएँ से पानी की आपूर्ति होती थी। मंदिर के सामने बने विशाल मंच पर वर्षभर धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस मंच का उद्घाटन वर्ष 1999 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर जोशी ने किया था। निकट स्थित मंडप में संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम, संत नामदेव, संत एकनाथ, स्वामी शिवानंद, ह.भ.प. सावळाराम महाराज तथा भगवान श्रीराम और माता सीता की प्रतिमाएँ स्थापित हैं। मंदिर परिसर के सभागार में विवाह समारोह भी आयोजित किए जाते हैं।

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मंदिर का विस्तृत परिसर वट, पीपल, आम, कटहल, जामुन और नारियल जैसे अनेक प्राचीन वृक्षों से आच्छादित है, जो वातावरण को अत्यंत शांत एवं आध्यात्मिक बनाते हैं। मंदिर की वास्तुकला भी अत्यंत आकर्षक है। तीनों ओर सुंदर उद्यान विकसित किए गए हैं। मंदिर की संरचना दर्शन मंडप, सभा मंडप और गर्भगृह में विभाजित है। दर्शन मंडप में नंदी महाराज की प्रतिमा के आगे कछुए की मूर्ति स्थापित है, जो हिंदू मंदिर वास्तु परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक है। सभा मंडप के प्रवेश द्वार पर ललाटबिंब में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित है। गर्भगृह की बाईं ओर संगमरमर की गणपति प्रतिमा तथा दाईं ओर भगवान दत्तात्रेय की प्रतिमा विराजमान है। गर्भगृह सभा मंडप से कुछ नीचे स्थित है, जहाँ सीढ़ियाँ उतरकर पहुँचना पड़ता है।

गर्भगृह में स्थापित पत्थर की शिवपिंडी पीतल के पत्रों से अलंकृत है। उसके ऊपर फण फैलाए नागदेवता का छत्र बना हुआ है। शिवलिंग के पीछे बने देवकोष्ठ में माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर का शिखर कमल की पंखुड़ियों के मध्य खड़ा हुआ प्रतीत होता है, जो इसकी सबसे विशिष्ट स्थापत्य विशेषताओं में से एक है। प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु भगवान पीपलेश्वर महादेव के दर्शन के लिए आते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशाल उत्सव आयोजित होता है, जिसमें हजारों भक्त सम्मिलित होते हैं। श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को मंदिर परिसर मेले का स्वरूप धारण कर लेता है। श्रावण मास में विवाहित महिलाएँ विशेष श्रद्धा के साथ शिवपूजन करती हैं। पहले सोमवार को चावल, दूसरे सोमवार को तिल, तीसरे सोमवार को मूंग तथा अंतिम सोमवार को जौ अर्पित कर 'शिवमूठ' चढ़ाने की परंपरा आज भी श्रद्धापूर्वक निभाई जाती है।

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श्री पीपलेश्वर महादेव भक्त मंडल (ट्रस्ट) केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी निभाता है। ट्रस्ट द्वारा वर्षभर अनेक सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पिछले 21 वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए एसएससी व्याख्यानमाला का आयोजन भी नियमित रूप से किया जा रहा है, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जा रहा है। आस्था, इतिहास, प्राकृतिक सौंदर्य और सामाजिक सेवा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करने वाला श्री पीपलेश्वर महादेव मंदिर आज डोंबिवली ही नहीं, बल्कि संपूर्ण ठाणे जिले के प्रमुख शिवधामों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है।